अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत पर ऊंचे शुल्क की बात करते रहे। माना जा रहा था कि इससे भारतीय कारोबार को बड़ा झटका लगेगा। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। दबाव और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत ने चुपचाप अपनी चाल चली और निर्यात में बढ़त दर्ज कर ली। दिसंबर 2025 में भारत का निर्यात बढ़कर 38.5 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। यह दिखाता है कि धमकियों के बीच भी भारत की कारोबारी पकड़ कमजोर नहीं हुई।
दिसंबर में निर्यात की मजबूत तस्वीर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर महीने में निर्यात में करीब दो प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह उस समय हुआ जब दुनिया के कई देशों में मांग सुस्त रही। इससे साफ है कि भारतीय उत्पादों की जरूरत बनी हुई है। इंजीनियरिंग सामान इलेक्ट्रॉनिक्स समुद्री उत्पाद और दवाइयों की मांग ने निर्यात को सहारा दिया। यही वजह रही कि दबाव के बावजूद भारत पीछे नहीं हटा।
आयात बढ़ा तो घाटा भी बढ़ा
निर्यात बढ़ने के साथ एक दूसरी सच्चाई भी सामने आई। भारत ने आयात भी ज्यादा किया। दिसंबर में आयात बढ़कर 63.55 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। इसी कारण व्यापार घाटा बढ़कर 25 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। व्यापार घाटा यानी निर्यात और आयात के बीच का अंतर। हालांकि जानकार मानते हैं कि बढ़ता आयात देश की मांग और उत्पादन गतिविधियों को भी दिखाता है।
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पूरे वित्तीय साल की स्थिति
अप्रैल से दिसंबर की अवधि को देखें तो तस्वीर और साफ होती है। इस दौरान देश का कुल माल निर्यात 330 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। वहीं आयात करीब 579 अरब डॉलर तक पहुंच गया। नौ महीनों में कुल व्यापार घाटा 248 अरब डॉलर से ऊपर रहा। इसके बावजूद सरकार और कारोबारी जगत इसे संतुलित मान रहे हैं क्योंकि निर्यात की रफ्तार बनी हुई है।
सरकार को क्यों है भरोसा
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि वैश्विक माहौल चुनौतीपूर्ण है फिर भी भारत का निर्यात सकारात्मक दिशा में है। सरकार को उम्मीद है कि इस पूरे साल में सामान और सेवाओं का कुल निर्यात 850 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। उनका कहना है कि भारत ने अपने बाजारों को फैलाया है और एक देश पर निर्भरता कम की है।
अमेरिका को भेजा ज्यादा माल
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अमेरिका को भारत का निर्यात और बढ़ गया। अप्रैल से दिसंबर के दौरान अमेरिका को भेजे गए सामान में करीब दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 65.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जबकि अमेरिका ने भारत पर ऊंचे शुल्क लगाए हैं। इससे साफ है कि भारत की रणनीति काम कर रही है। इसलिए सवाल यही है कि जब आंकड़े मजबूत हैं तो टैरिफ को लेकर डरने की जरूरत आखिर क्यों।