
नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगामामादा राबुका की मुलाकात भारत-फिजी संबंधों के लिए ऐतिहासिक साबित हुई. इस बैठक में दोनों देशों ने आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए सात अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए. प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि भारत और फिजी महासागरों से भले ही दूर हों, लेकिन हमारी आकांक्षाएं एक ही नाव पर सवार हैं. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि फिजी जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है और भारत उसकी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए हरसंभव मदद करेगा. उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में 33 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने फिजी का दौरा किया था. उसी समय भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच (FIPIC) की शुरुआत हुई थी, जिसने न सिर्फ भारत-फिजी संबंधों बल्कि पूरे प्रशांत क्षेत्र के साथ भारत के रिश्तों को नई मजबूती दी. मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री राबुका की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ रही है.
दोनों देशों के बीच हुए बड़े समझौते
भारत और फिजी ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है. इसके लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है. भारत फिजी को समुद्री सुरक्षा में प्रशिक्षण और उपकरण सहायता प्रदान करेगा. मोदी ने कहा कि भारत और फिजी दोनों एक स्वतंत्र, समावेशी, खुले, सुरक्षित और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करते हैं. यह सहयोग इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रशांत क्षेत्र में चीन लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में भारत का फिजी के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फिजी को भारत ने न केवल एक भरोसेमंद साझेदार बताया, बल्कि यह भी कहा कि उसका सहयोग पूरे क्षेत्र की स्थिरता और विकास में योगदान देगा.
दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होंगे समझौते
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अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा विकासशील देशों का साझीदार रहा है और उनकी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. वहीं फिजी के प्रधानमंत्री राबुका ने कहा कि भारत और फिजी का रिश्ता गहरी जड़ों वाला है और यह सहयोग आने वाले समय में और मजबूत होगा.
भारत और फिजी के बीच हुए सात समझौतों और नई कार्ययोजना से दोनों देशों के रिश्तों को नई गति मिलेगी. रक्षा, समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में सहयोग न सिर्फ दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा, बल्कि पूरे प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और विकास की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा.