हवाई यात्रा को सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन एक नई संसदीय समिति की रिपोर्ट ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश की लगभग 50 फीसदी कमर्शियल फ्लाइट्स में किसी न किसी तरह की तकनीकी दिक्कत पाई गई है। यह खुलासा पिछले साल किए गए बड़े ऑडिट के आधार पर सामने आया है।
हर दूसरी फ्लाइट में मिली खराबी
रिपोर्ट के मुताबिक 754 कमर्शियल फ्लाइट्स के ऑडिट में से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गईं। यानी लगभग हर दूसरी फ्लाइट में कोई न कोई समस्या दर्ज की गई। यह आंकड़ा एविएशन सेक्टर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
किन एयरलाइंस में ज्यादा समस्या
ऑडिट में सबसे ज्यादा जांच इंडिगो की फ्लाइट्स की हुई, जिनमें 405 में से 148 विमानों में तकनीकी दिक्कत मिली। वहीं एयर इंडिया की 166 उड़ानों में से 137 में और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 101 में से 54 फ्लाइट्स में बार-बार खामियां सामने आईं। इससे साफ है कि समस्या किसी एक एयरलाइन तक सीमित नहीं है।
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पायलट ट्रेनिंग और स्टाफ की कमी भी चिंता
रिपोर्ट में बोइंग 787 और 777 जैसे विमानों के पायलटों की ट्रेनिंग में कमियां भी सामने आई हैं। साथ ही कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में पर्याप्त केबिन क्रू नहीं होने और फ्लाइट ड्यूटी टाइम नियमों के उल्लंघन जैसी गंभीर बातें भी उजागर हुई हैं। यह यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।
DGCA की क्षमता पर भी सवाल
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नियामक संस्था DGCA में करीब 48% पद खाली हैं। स्टाफ की कमी के कारण तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर की निगरानी प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रही है, जिससे जोखिम बढ़ सकता है।
सुधार की सिफारिश
संसदीय पैनल ने इन खामियों को दूर करने के लिए सख्त कदम उठाने की सलाह दी है। बेहतर निगरानी, कड़े नियमों का पालन और संस्थागत सुधारों की जरूरत पर जोर दिया गया है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यात्रियों के लिए क्या मतलब
हालांकि यह रिपोर्ट चिंता जरूर बढ़ाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उड़ान पूरी तरह असुरक्षित है। बल्कि यह एक चेतावनी है कि सिस्टम में सुधार की जरूरत है। यात्रियों को भी सतर्क रहकर एयरलाइन की जानकारी और सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना चाहिए।