अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से दुनिया भर के बाजारों में हलचल है। कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर की मजबूती निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं। इसी बीच भारत के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। जहां एक तरफ रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, वहीं दूसरी ओर देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया रिकॉर्ड
भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 13 फरवरी को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 8.66 अरब डॉलर बढ़कर 725.72 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले के सप्ताह में यह घटकर 717.06 अरब डॉलर पर आ गया था। जनवरी में भी भंडार ने नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन इस बार यह उससे भी ऊपर चला गया है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़त
रिजर्व बैंक के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां होती हैं। इस बार यह 3.55 अरब डॉलर बढ़कर 573.60 अरब डॉलर तक पहुंच गईं। इन परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कुल भंडार पर पड़ता है।
ये भी पढ़ें : Delhi से Meerut सिर्फ 39 मिनट, Namo Bharat ने दिखाई रफ्तार; 22 फरवरी से आम सफर शुरू
सोने और अन्य भंडार में इजाफा
इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य भी बढ़ा है। सोने का भंडार करीब 4.99 अरब डॉलर बढ़कर 128.46 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की आरक्षित स्थिति में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे देश की वित्तीय स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
फिर भी क्यों गिरा रुपया
विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड पर होने के बावजूद रुपया कमजोर रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 31 पैसे गिरकर 90.99 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 91.04 के निचले स्तर तक भी पहुंच गया। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक अनिश्चितता की वजह से निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
आगे क्या संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारत के लिए सुरक्षा कवच की तरह है। इससे बाहरी झटकों से निपटने में मदद मिलती है। हालांकि वैश्विक हालात सुधरने तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक आधार मजबूत है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय माहौल का असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है।