भारत तेजी से आर्थिक शक्ति बनता जा रहा है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने बताया था कि भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। देश की इकोनॉमी 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है, जो जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे विकसित देशों से भी आगे है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी अपने अनुमान में कहा है कि 2026 में भी भारत यही स्थान बनाए रखेगा और करीब 4.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रहेगा।
जापान को पीछे छोड़ेगा जल्द भारत
बड़ी इन्वेस्टमेंट कंपनी मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक भारत 2028 तक जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा। वहीं, 2035 तक देश की अर्थव्यवस्था बढ़कर 10.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भी भारत की ग्रोथ को लेकर मजबूत अनुमान जताया है। उनके अनुसार भारत की इकोनॉमी 2025 में 7% की दर से बढ़ेगी, जबकि 2026 और 2027 में भी ग्रोथ लगभग 6.4% से 6.5% के बीच रहने की उम्मीद है। इन लगातार बेहतर अनुमानों से यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में भारत आर्थिक विकास की बड़ी शक्ति बनने जा रहा है।
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सरकार की सहायता की जरूरत
जाने-माने अर्थशास्त्री आलोक पुराणिक कहते हैं कि भारत की इकोनॉमी को समझने के लिए इसकी आबादी और आय असमानता पर ध्यान देना जरूरी है। देश की 5% आबादी आर्थिक रूप से सबसे समृद्ध है जिसे वे इंडिया का अमेरिका कहते हैं। वहीं 35-40 करोड़ लोग मिडिल क्लास यानी इंडिया का मलेशिया हैं। बाकी 80 करोड़ आबादी इंडिया का युगांडा है, जिसे सरकार की सहायता की जरूरत है। उनका मानना है कि जब यह 80 करोड़ आबादी धीरे-धीरे ऊपर उठेगी, तब भारत की पर कैपिटा आय में बड़ा उछाल आएगा। वे कहते हैं कि आज भारत की बड़ी जनसंख्या एक भार नहीं, बल्कि ताकत बन चुकी है क्योंकि यही बड़ा बाजार दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित कर रहा है।
सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री भी बड़ी भूमिका
भारत की अर्थव्यवस्था को तेज़ी देने में केवल मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि टूरिज्म, मेडिकल, एजुकेशन, सर्विस सेक्टर और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इन सेक्टरों में अपार संभावनाएं हैं और इन पर ध्यान देने से भारत अगले कुछ वर्षों में और मजबूती से आगे बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत निश्चित रूप से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा, लेकिन विकसित देशों की श्रेणी में आने के लिए आय असमानता कम करना और पर कैपिटा आय बढ़ाना जरूरी होगा। कुल मिलाकर भारत आर्थिक रूप से एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और आने वाले साल देश के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकते हैं।