भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए फ्रांस के साथ मिलकर स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर जेट इंजन बनाने की तैयारी कर ली है। यह इंजन भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत भारत को पूरी तकनीक का हस्तांतरण मिलेगा, जिससे देश में ही इंजन का डिज़ाइन, परीक्षण और उत्पादन होगा। इससे भारतीय वायुसेना की क्षमता नई ऊंचाई पर पहुंचेगी।
क्यों खास है यह प्रोजेक्ट
भारत अब तक पूरी तरह से स्वदेशी जेट इंजन बनाने में सक्षम नहीं हो पाया है। इस सहयोग से न केवल उच्च शक्ति वाले 120 kN इंजन का निर्माण संभव होगा, बल्कि देश में एयरो-इंजन तकनीक का एक नया इकोसिस्टम भी विकसित होगा।
तकनीक हस्तांतरण से आत्मनिर्भरता
फ्रांसीसी कंपनी से भारत को 100% तकनीकी हस्तांतरण मिलेगा। इसका अर्थ है कि इंजन का पूरा डिज़ाइन, डेवलपमेंट, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन भारत में होगा। इससे आने वाले समय में स्वदेशी विमानों के लिए विदेशी इंजन पर निर्भरता कम हो जाएगी।
भारतीय वायुसेना का भविष्य
भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में सात स्क्वाड्रन यानी 126 AMCA लड़ाकू विमान शामिल करने की योजना बना रही है। शुरुआती स्क्वाड्रन विदेशी इंजन से संचालित होंगे, लेकिन बाद के विमानों में नया स्वदेशी इंजन लगाया जाएगा। यह कदम भारत को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा।
समयसीमा और लक्ष्य
इस प्रोजेक्ट को 2035 तक उत्पादन स्तर पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें स्टेल्थ डिज़ाइन, एडवांस्ड सेंसर और उच्च थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं होंगी। यह भारत के लिए रक्षा आत्मनिर्भरता और वैश्विक सहयोग का ऐतिहासिक पड़ाव साबित हो सकता है।