भारत-फ्रांस रिश्तों में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा—“वेलकम टू इंडिया, माय डियर फ्रेंड।” मैक्रों की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर बड़े फैसले संभव हैं। खासतौर पर 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील पर सबकी नजरें टिकी हैं।
114 राफेल डील: रक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ा कदम
मैक्रों की इस यात्रा का सबसे चर्चित एजेंडा 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद है। रक्षा अधिग्रहण परिषद की मंजूरी के बाद यह मेगा प्रोजेक्ट लगभग ₹3.60 लाख करोड़ का बताया जा रहा है। खास बात यह है कि अधिकांश विमानों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में ही किया जाएगा। इससे भारतीय रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलेगी और हजारों रोजगार अवसर भी पैदा होंगे।
AI पर रणनीतिक साझेदारी: टेक्नोलॉजी में नया अध्याय
नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान दोनों नेताओं की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है। भारत और फ्रांस के बीच एआई रिसर्च, साइबर सुरक्षा और डिजिटल इनोवेशन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी दोनों देशों को वैश्विक टेक प्रतिस्पर्धा में नई बढ़त दिला सकती है।
आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को नई रफ्तार
मैक्रों के साथ आए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में कई उद्योग और डिजिटल क्षेत्र के दिग्गज शामिल हैं। हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद यह दौरा और भी महत्वपूर्ण हो गया है। रक्षा, ऊर्जा, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सेक्टर में निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
वैश्विक मंच पर मजबूत होती दोस्ती
भारत और फ्रांस के रिश्ते केवल व्यापार या रक्षा तक सीमित नहीं हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की सोच काफी हद तक समान है। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह दोस्ती वैश्विक प्रगति में योगदान देगी और साझा मूल्यों को आगे बढ़ाएगी।
तीन दिन, कई समझौते और नई दिशा
मुंबई और नई दिल्ली में होने वाली बैठकों के दौरान कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर संभव हैं। यह दौरा रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ भारत-फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।