भारत अब सिर्फ आईटी या फार्मा ही नहीं, बल्कि रक्षा तकनीक से जुड़ी केमिकल सप्लाई में भी बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, भारत ऐसे विशेष ईंधन योजक (Fuel Additives) रूस और अमेरिका जैसे देशों को सप्लाई कर रहा है, जिनसे उनके जंगी जहाजों के इंजन और भी शक्तिशाली बन जाते हैं। ये केमिकल इंजन की कार्यक्षमता बढ़ाने, घिसावट कम करने और अत्यधिक तापमान में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
क्या हैं ये फ्यूल एडिटिव्स?
फ्यूल एडिटिव्स यानी ईंधन योजक रासायनिक यौगिक होते हैं जिन्हें विमान के ईंधन में मिलाया जाता है। इससे इंजन की उम्र बढ़ती है, प्रदर्शन बेहतर होता है और अत्यधिक ठंड या गर्मी में भी इंजन सुचारू रूप से काम करता है। इनका प्रयोग न केवल वाणिज्यिक विमानों में बल्कि फाइटर जेट्स में भी होता है। भारत इन उत्पादों का निर्यात अमेरिका सहित कई देशों को करता है और यह पूरी तरह वैध औद्योगिक व्यापार के अंतर्गत आता है।
रूसी जेट्स में भारतीय केमिकल का इस्तेमाल
जानकारी के अनुसार, रूस के Su-34 और Su-35S जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों में भारत से निर्यात किए गए फ्यूल एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये जेट्स यूक्रेन युद्ध में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। भारत से भेजे गए ये एडिटिव्स इंजन की ताकत और कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं, जिससे ये लड़ाकू विमान लंबी दूरी तक लगातार उड़ान भर सकते हैं।
कौन सी कंपनियां कर रही हैं निर्यात
दिल्ली और मुंबई स्थित कई भारतीय कंपनियां पेट्रोकेमिकल और एविएशन स्पेयर पार्ट्स के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने 2024 में रूस को सैकड़ों टन फ्यूल एडिटिव्स की आपूर्ति की है। यह व्यापार कानूनी है और इनका उपयोग ऊर्जा, रिफाइनरी और औद्योगिक कार्यों में भी किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब इस सेगमेंट में एक उभरता हुआ ग्लोबल सप्लायर बन चुका है।
भारत की बढ़ती टेक्नोलॉजी पावर
भारत का यह केमिकल डिप्लोमेसी मॉडल न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है बल्कि तकनीकी रूप से देश को विश्व पटल पर नई पहचान भी दिला रहा है। ये फ्यूल एडिटिव्स आने वाले समय में ऊर्जा, रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करेंगे।