ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव ने पूरी दुनिया के तेल बाजार को हिला दिया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। कई देशों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि भारत में अभी तक आम लोगों को राहत देते हुए कीमतें स्थिर रखी गई हैं, लेकिन इसके पीछे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। अब आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में भारत में भी पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं।
हर महीने बढ़ रहा नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना 700 से 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। महीने के हिसाब से यह आंकड़ा करीब 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सरकारी कंपनियां लगातार नुकसान सहकर भी सप्लाई बनाए हुए हैं। सरकार अभी तक कीमतों में बढ़ोतरी रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन बढ़ती अंडर रिकवरी ने कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। यही वजह है कि अब कीमतों में बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मिडिल ईस्ट युद्ध का असर
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत के 40 प्रतिशत कच्चे तेल, 90 प्रतिशत एलपीजी और 65 प्रतिशत नैचुरल गैस की आपूर्ति इसी क्षेत्र से जुड़ी हुई है। इसके बावजूद पिछले कई हफ्तों से देश में ईंधन की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रखी गई। लेकिन इस स्थिरता की बड़ी कीमत तेल कंपनियों को चुकानी पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो कीमतों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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कच्चा तेल पहुंचा 120 डॉलर
दो महीने पहले तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 120 डॉलर तक पहुंच गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की कोशिश अभी तक यही रही है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। हालांकि लगातार बढ़ती लागत के कारण तेल कंपनियों का घाटा तेजी से बढ़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक अप्रैल में पेट्रोल पर करीब 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 25 रुपये प्रति लीटर तक की अंडर रिकवरी देखी गई।
सरकार ने दी राहत
सरकार ने नुकसान कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी की है। पेट्रोल पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर की गई, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगभग खत्म कर दी गई। इसके बावजूद सरकार को हर महीने करीब 14 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान झेलना पड़ रहा है। अगर टैक्स में कटौती नहीं की जाती तो तेल कंपनियों का नुकसान और ज्यादा बढ़ सकता था। यही वजह है कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
भारत में बढ़ सकती हैं कीमतें
दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल पहले ही महंगे हो चुके हैं। स्पेन, जापान, इजरायल, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर हैं और सप्लाई भी सामान्य बनी हुई है। लेकिन लगातार बढ़ते नुकसान और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए आने वाले समय में भारत में भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।