भारत ने खाड़ी देशों के संगठन गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। भारत और जीसीसी के बीच एफटीए बातचीत शुरू करने के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर सहमति बन गई है। इस समझौते से जुड़ी जानकारी केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने औपचारिक रूप से बातचीत शुरू करने की प्रक्रिया तय कर ली है।
टर्म्स ऑफ रेफरेंस से तय होगी बातचीत की दिशा
टर्म्स ऑफ रेफरेंस यानी टीओआर, इस प्रस्तावित ट्रेड डील के दायरे और बातचीत के तरीकों को तय करेगा। जीसीसी में छह खाड़ी देश शामिल हैं, जिनमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। यह वही क्षेत्र है, जहां भारत के साथ व्यापार और ऊर्जा संबंध पहले से मजबूत रहे हैं। इस पहल को भारत की तेजी से बढ़ती वैश्विक आर्थिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भारत को क्या होगा सीधा फायदा
इस एफटीए से भारत को सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण में मिलने की उम्मीद है। खाड़ी देश भारत के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के प्रमुख सप्लायर हैं। समझौता होने की स्थिति में भारत को बेहतर शर्तों पर ऊर्जा संसाधन मिल सकते हैं। इसके अलावा, निवेश और द्विपक्षीय व्यापार को भी नई रफ्तार मिलने की संभावना है। जीसीसी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जिनके लिए भी यह समझौता फायदेमंद साबित हो सकता है।
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पहले भी हो चुकी है बातचीत, अब नई शुरुआत
भारत और जीसीसी के बीच एफटीए को लेकर पहले भी 2006 और 2008 में बातचीत हुई थी, लेकिन इसके बाद जीसीसी ने सभी देशों के साथ ट्रेड वार्ता रोक दी थी। इसी वजह से तीसरा दौर शुरू नहीं हो सका। अब एक बार फिर दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटे हैं, जिससे लंबे समय से अटके इस समझौते को आगे बढ़ाने की उम्मीद जगी है।
भारत और जीसीसी के बीच क्या होता है कारोबार
भारत जीसीसी देशों से मुख्य रूप से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करता है। इसके बदले भारत इन देशों को कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर, धातु, मशीनरी, केमिकल, स्टील और ज्वेलरी जैसे उत्पाद निर्यात करता है। बीते सालों में यह व्यापार लगातार बढ़ा है और जीसीसी भारत के सबसे अहम ट्रेड पार्टनर्स में शामिल हो चुका है।
आंकड़े बताते हैं रिश्तों की गहराई
2024-25 में भारत और जीसीसी के बीच कुल व्यापार बढ़कर करीब 178.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, जबकि सऊदी अरब और कतर भी अहम भूमिका निभाते हैं। एफटीए लागू होने की स्थिति में यह व्यापार और तेजी से बढ़ सकता है। यही वजह है कि इस कदम को भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।