India GDP Growth 2026: भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है। यह आंकड़ा वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच राहत देने वाला है, लेकिन इसी के साथ GDP की नई सीरीज और आंकड़ों में संशोधन को लेकर सवाल भी उठे हैं। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने आंकड़ों पर आपत्ति जताई, जबकि सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने हेरफेर के आरोपों को खारिज किया। दोनों ने 2047 के लक्ष्य को लेकर बड़ी चेतावनी भी दी है।
7.8% ग्रोथ पर बहस
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही है। पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई चुनौतियों के बीच आया यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, GDP के आंकड़े जारी होने के बाद इनकी गणना और नई GDP सीरीज को लेकर बहस शुरू हो गई। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने पिछली अवधि के आंकड़ों में हुए संशोधन पर सवाल उठाए और दावा किया कि वास्तविक वृद्धि दर 7.8% से काफी कम है। उन्होंने एक समय इसे 2.6% बताया, हालांकि बाद में अपने ही दावे को संशोधित करते हुए इसे 5% तक बताया। दूसरी ओर, सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने GDP आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि मौजूदा ग्रोथ मजबूत है, लेकिन 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए यह रफ्तार पर्याप्त नहीं होगी।
आंकड़ों पर उठे सवाल
सुभाष चंद्र गर्ग की आपत्ति मुख्य रूप से नई GDP सीरीज में पिछली अवधि के आंकड़ों में हुए बदलाव को लेकर है। उनका कहना था कि पिछले साल की पहली तिमाही में मौजूदा कीमतों पर GDP का आंकड़ा पहले करीब 86 लाख करोड़ रुपये बताया गया था, जिसे नई GDP सीरीज में घटाकर करीब 80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। करीब 6 लाख करोड़ रुपये के इस अंतर को लेकर उन्होंने सवाल उठाया और इसी आधार पर मौजूदा GDP ग्रोथ की गणना पर भी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि पुराने और नए आंकड़ों को अलग-अलग आधार पर देखने पर वृद्धि दर काफी कम दिखाई देती है। हालांकि, इस तरीके को सरकार और अर्थशास्त्रियों ने सही नहीं माना। उनका कहना है कि अलग-अलग सांख्यिकीय सीरीज के आंकड़ों को मिलाकर GDP की वृद्धि दर निकालना उचित नहीं है। नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है और आंकड़े तैयार करने के लिए बेहतर डेटा सोर्स और नई मेथोडोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।
कांग्रेस ने भी घेरा
GDP के आंकड़ों को लेकर उठी आपत्ति के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस में भी बदल गया। कांग्रेस ने नई GDP सीरीज, GDP डिफ्लेटर और पुराने आंकड़ों में हुए संशोधनों को लेकर सरकार से सवाल किए। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि नई सीरीज में चार वर्षों के दौरान भारत की GDP में करीब 43 लाख करोड़ रुपये की कमी दिखाई गई है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि GDP की नई सीरीज में गणना का आधार और तरीका बदला गया है। इसी बीच अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी GDP में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया। भल्ला का तर्क है कि अगर GDP के आंकड़ों को कृत्रिम तरीके से बढ़ाकर दिखाने की कोशिश होती, तो खपत के आंकड़ों में भी उसी तरह बढ़ोतरी दिखाई देती। लेकिन नई सीरीज में खपत को उलटे नीचे संशोधित किया गया है। उनके मुताबिक फिलहाल ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिसके आधार पर GDP आंकड़ों में छेड़छाड़ की बात कही जा सके।
2047 की असली चुनौती
GDP विवाद से अलग दोनों अर्थशास्त्रियों की सबसे अहम बात भारत के विकसित देश बनने के लक्ष्य को लेकर है। सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया दोनों का मानना है कि 7.8% की ग्रोथ निश्चित तौर पर सकारात्मक है, लेकिन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लंबे समय तक इससे भी तेज आर्थिक विकास की जरूरत होगी। मोंटेक सिंह अहलूवालिया कांग्रेस नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान योजना आयोग के डिप्टी चेयरमैन रह चुके हैं और 2004 से 2014 के बीच आर्थिक नीति और सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका रही थी। उन्होंने निवेश-GDP अनुपात में करीब 34% तक की मजबूती को सकारात्मक संकेत माना, लेकिन साथ ही कहा कि डॉलर के लिहाज से प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए भारत को अभी काफी तेज विकास दर चाहिए। उनका कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले के कई निराशावादी अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है, लेकिन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए मौजूदा रफ्तार पर्याप्त नहीं है।
रोजगार और सुधार जरूरी
तेज GDP ग्रोथ के साथ सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक विकास का फायदा व्यापक आबादी तक पहुंचे और पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा हों। अर्थव्यवस्था में अगर अलग-अलग वर्गों की आय और अवसरों में बड़ा अंतर बना रहता है, तो विकास का मॉडल K-shaped हो सकता है। इसी वजह से केवल GDP का आंकड़ा बढ़ना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। भारत को रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों को मजबूत करने, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार में अपनी भागीदारी बढ़ाने जैसे क्षेत्रों पर काम करना होगा। सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने आर्थिक सुधारों को तेज करने की जरूरत पर जोर दिया है। इनमें टैरिफ कम करना, उद्योगों के लिए आयातित इनपुट को सस्ता करना और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना शामिल है। अहलूवालिया ने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों का फायदा उठाने की जरूरत भी बताई। ऐसे में 7.8% की मौजूदा ग्रोथ भारत के लिए एक मजबूत शुरुआत जरूर है, लेकिन 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार ऊंची ग्रोथ, रोजगार, प्रति व्यक्ति आय और व्यापक आर्थिक सुधारों पर एक साथ ध्यान देना होगा।