वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, अमेरिका के टैरिफ दबाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही। वहीं जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो अनुमान से बेहतर मानी जा रही है।
नॉमिनल GDP भी बढ़ी
वित्त वर्ष 2025-26 में देश की नॉमिनल GDP में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वास्तविक GDP बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 299.89 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं नॉमिनल GDP 346.36 लाख करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 318.07 लाख करोड़ रुपये थी। यह बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को दर्शाती है।
कई सेक्टर बने ग्रोथ के इंजन
कृषि और मत्स्य पालन जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। वहीं उद्योग और विनिर्माण से जुड़े सेकेंड्री सेक्टर में 8.8 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र में 9.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। मैन्युफैक्चरिंग, होटल, परिवहन, संचार, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों ने दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज कर अर्थव्यवस्था को मजबूती दी।
ये भी पढ़ें : सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, एक दिन में टूटी कीमतें; US बना मुख्य वजह
खर्च और निवेश में भी बढ़ोतरी
घरेलू मांग और निवेश में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। निजी उपभोग व्यय और स्थायी पूंजी निर्माण दोनों में 7.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि उपभोक्ता खर्च और निवेश गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं, जो भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
बदला गया बेस ईयर
मंत्रालय ने बताया कि नए GDP आंकड़े संशोधित श्रृंखला के आधार पर जारी किए गए हैं, जिसमें बेस ईयर को बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। इससे वर्तमान आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक आकलन संभव हो पाया है।
आगे की राह पर सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की मजबूती का संकेत है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था की यह रफ्तार निवेशकों और कारोबार जगत के लिए भरोसा बढ़ाने वाली मानी जा रही है।