अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच अमेरिका ने भारत को बड़ी राहत देते हुए रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है। इस फैसले से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और तेल संकट से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ईरान युद्ध से बढ़ी तेल संकट की चिंता
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है। भारत के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के लगभग 40 प्रतिशत तेल आयात इसी रास्ते से होकर आते हैं।
भारत को 30 दिन की विशेष छूट
तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि समुद्र में फंसे रूसी तेल की बिक्री भारत को जारी रखने के लिए यह अनुमति दी गई है। इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में राहत मिलेगी। इससे पहले यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे और अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने से भी चेतावनी दी थी।
भारत की रिफाइनरी कंपनियां हुईं सक्रिय
छूट मिलने के बाद भारत की प्रमुख तेल रिफाइनरी कंपनियां फिर से सक्रिय हो गई हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ट्रेडर्स से संपर्क कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द रूसी तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। सूत्रों के मुताबिक इन कंपनियों ने पहले ही लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी कच्चे तेल की खरीद कर ली है।
समुद्र में क्यों रुके थे रूसी तेल टैंकर
दरअसल, अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण रूस के कई तेल टैंकर समुद्र में ही खड़े रहे। शिपिंग कंपनियों और टैंकरों पर लगे प्रतिबंधों के चलते बीमा, भुगतान और बंदरगाहों पर प्रवेश को लेकर कई सवाल खड़े हो गए थे। इसी वजह से भारत के रिफाइनर्स भी सावधानी बरतते हुए कुछ समय तक तेल उतारने से बच रहे थे और जहाजों को समुद्र में ही रोक दिया गया था।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला
भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक आयातित कच्चे तेल पर निर्भर करती हैं। देश में मौजूद तेल भंडार सीमित समय के लिए ही पर्याप्त होता है। ऐसे में अमेरिका की ओर से मिली यह अस्थायी छूट भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे न केवल तेल आपूर्ति में स्थिरता बनी रहेगी बल्कि वैश्विक संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।