White Peacock Geneva : भारत की ओर से जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को पांच युवा नर मोर भेंट किए गए हैं। इन पांच पक्षियों में चार सामान्य नीले मोर हैं, जबकि एक सफेद मोर भी शामिल है। सफेद मोर की मौजूदगी ने इस पूरे घटनाक्रम को खास बना दिया है। इन मोरों को जिनेवा के एरियाना पार्क में रखा गया है। नए वातावरण में सहज होने तक इनके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके बाद इन्हें परिसर के उपयुक्त हिस्से में रखा जाएगा, जहां आने वाले लोग इन्हें देख सकेंगे।
चार दशक से भी पुरानी परंपरा फिर हुई शुरू
इस उपहार का संबंध भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच एक पुरानी परंपरा से भी है। वर्ष 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली के चिड़ियाघर से मोरों की एक जोड़ी संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को भेंट की थी। अब करीब 45 साल बाद पांच नए मोरों का जिनेवा पहुंचना उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। इस तरह यह पहल केवल पक्षियों को उपहार में देने तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों संस्थाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की याद भी दिलाती है।
सफेद मोर क्यों है इतना खास
इस पूरे उपहार में सबसे ज्यादा चर्चा सफेद मोर की हो रही है। सफेद मोर आम नीले मोर की तुलना में बेहद अलग दिखाई देता है। इसके शरीर और पंखों पर सफेद रंग होने के कारण यह दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। हालांकि सफेद मोर को अक्सर अल्बिनो समझ लिया जाता है, लेकिन हर सफेद मोर अल्बिनो नहीं होता। कई सफेद मोरों में आनुवंशिक कारणों से रंगद्रव्य का अभाव होता है, जबकि उनकी आंखों का रंग सामान्य रह सकता है।
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भारत की पहचान से जुड़ा है मोर
मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और भारतीय संस्कृति में इसका विशेष महत्व रहा है। कला, साहित्य, लोक परंपराओं और धार्मिक प्रतीकों में मोर की मौजूदगी सदियों से दिखाई देती रही है। संयुक्त राष्ट्र परिसर में भारतीय मोरों की मौजूदगी भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को एक अलग अंदाज में सामने लाएगी। खास तौर पर दुर्लभ सफेद मोर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।