India Global Defence Partnerships : भारत अब वैश्विक रक्षा क्षेत्र में केवल हथियार खरीदने और बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दूसरे देशों के साथ मिलकर नई तकनीक विकसित करने और रक्षा उपकरणों का उत्पादन करने पर जोर दे रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने VISV-2026 कार्यक्रम में भारत की इसी रणनीति का रोडमैप साझा किया। उन्होंने बताया कि अगले दशक में रणनीतिक साझेदारी, स्वदेशी रक्षा निर्यात, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा भारत की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे। इस दौरान उन्होंने बदलती युद्ध तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका पर भी बात की।
अगले दशक के लिए तैयार हुआ रक्षा रोडमैप
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत के हाल ही में जारी 'रक्षा' फ्रेमवर्क में अगले दशक के लिए वैश्विक साझेदारियों की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत दूसरे देशों के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत करने, रक्षा क्षमताओं का विकास करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा। भारत का उद्देश्य अलग-अलग देशों के साथ ऐसे संबंध बनाना है, जिनसे दोनों पक्षों को लाभ मिले। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा को भी रक्षा सहयोग का अहम हिस्सा बनाया गया है।
https://twitter.com/PTI_News/status/2116035183501795547
महासागर विजन से मजबूत होगी समुद्री सुरक्षा
विक्रम मिसरी ने भारत के 'सागर' विजन का जिक्र करते हुए कहा कि यह अब 'महासागर' के रूप में आगे बढ़ रहा है। इसके तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में फर्स्ट रिस्पॉन्डर और नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका मजबूत करना चाहता है। फर्स्ट रिस्पॉन्डर का मतलब है कि समुद्री संकट या आपदा के समय भारत सबसे पहले सहायता पहुंचाने की क्षमता विकसित करे। वहीं, नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के तौर पर क्षेत्रीय देशों की समुद्री सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देने पर जोर है।
ड्रोन और AI बदल रहे युद्ध का स्वरूप
विदेश सचिव ने कहा कि आधुनिक युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर तकनीक और अंतरिक्ष क्षमताएं अब रक्षा रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं। इन तकनीकों ने प्रतिरोध यानी डिटेरेंस की पारंपरिक अवधारणा को भी बदल दिया है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के जरिए देश अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। भारत में रक्षा उत्पादन नए स्तर पर पहुंचा है और भारतीय रक्षा उपकरणों का निर्यात भी दर्जनों देशों तक हो रहा है।
ये भी पढ़ें : बनासकांठा से किसानों के लिए बड़ा ऐलान, पशुपालन से रेल कनेक्टिविटी तक गुजरात को मिली नई रफ्तार
खरीदार नहीं, सह-विकास का साझेदार बनेगा भारत
विक्रम मिसरी के मुताबिक, भारत अब वैश्विक रक्षा बाजार में केवल खरीदार या विक्रेता की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहता। देश सह-विकास, सह-उत्पादन और संयुक्त नवाचार पर आधारित साझेदारियां तैयार कर रहा है। यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी देशों और अफ्रीका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा उसके साझेदार देशों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। इसलिए रक्षा कूटनीति में तकनीक, उत्पादन और क्षमता निर्माण को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
रणनीतिक स्वायत्तता से तय होगी विदेश नीति
विदेश सचिव ने वैश्विक रणनीतिक परिस्थितियों को तेजी से बदलता और प्रतिस्पर्धी बताया। उन्होंने कहा कि संघर्ष, आतंकवाद, हथियारों के रूप में इस्तेमाल होने वाली सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण तकनीकों पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। ऐसे समय में कोई भी देश केवल अपने भूगोल या पारंपरिक गठबंधनों पर निर्भर नहीं रह सकता। भारत की विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-गठबंधन के सिद्धांतों पर आधारित है। इसका मतलब है कि भारत अलग-अलग देशों के साथ मुद्दों के आधार पर सहयोग करेगा, लेकिन अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखेगा।