उधर पाकिस्तान चीन और तुर्की के साथ मिलकर अपने हथियारों को बढ़ा रहा है तो वहीं भारत में भी जल्द ही इंडियन आर्मी के लिए नया एयर डिफेंस सिस्टम बनेगा. जिससे भारत की ताकत कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगी, जिसने अभी से पाकिस्तान में हलचल मचा दी है, खबर है कि अब भारत लंबी दूरी का ऐसा स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है जो S400 जितना ही पावरफुल होगा.
तीन तरह की मिसाइलों से लैस होगा
रिपोर्ट्स की मानें तो प्रोजेक्ट कुशा के तहत DRDO के साथ मिलकर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस सिस्टम को तैयार कर रहा है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने ही आकाश एंटी मिसाइल सिस्टम बनाया था लेकिन प्रोजेक्ट कुशा के तहत बनने वाला नया एयर डिफेंस सिस्टम उससे भी ज्यादा ताकतवर होगा. नया एयर डिफेंस सिस्टम तीन तरह की मिसाइलों से लैस होगा.
पहली मिसाइल होगी M1, जिसकी रेंज 150 कि.मी. तक होगी
दूसरी मिसाइल की M2, जिसकी रेंज 250 कि.मी. तक होगी
तीसरी मिसाइल होगी M3, जिसकी रेंज 350 कि.मी. तक होगी
ऐसा बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट कुशा के तहत बनने वाला नया एयर डिफेंस सिस्टम कहीं भी ले जाया जा सकेगा. ये दुश्मन की मिसाइल, फाइटर जेट और ड्रोन हमलों को पलक झिपकते ही नाकाम कर देगा. सबसे बड़ी बात होगी कि इस स्वदेशी सिस्टम के कलों के लिए भारत किसी और देश पर निर्भर नहीं रहेगा. इसमें एक से डेढ़ साल तक का वक्त लग सकता है. यह स्वदेशी सिस्टम चार तरह के रडार सिस्टम से लैस होगा.
दुश्मन के हर आसमानी हमले का मिलेगा मुंहतोड़ जवाब
इसमें पहला होगा लॉन्ग रेंज सर्विलांस रडार जो 250 कि.मी. की दूरी तक के टारगेट का पता लगाएगा. दूसरा होगा फायर कंट्रोल रडार जो मिसाइलों को उनके टारगेट तक पहुंचाएगा और तीसरा होगा बीएचएफ रडार जो फिफ्थ जनरेशन के रडार से अदृश्य रहने वाले फाइटर जेट्स को भी आसानी से ट्रैक कर लेगा यानी यह एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के हर आसमानी हमले को मुंहतोड़ जवाब देगा.
देश के लिए कैसे साबित होगा गेम चेंजर ?
इस सिस्टम की मदद से पाकिस्तान, चीन सीमा पर भारत मजबूत स्थिति में आ जाएगा. चीन के स्टील फाइटर जेट, हाइपरसोनिक मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की क्षमता बढ़ेगी क्योंकि भारत स्वदेशी एयर डिफेंस में इसके लिए बदलाव कर पाएगा. पाकिस्तान के खिलाफ भारत की वायु सीमा लगभग अभेद्य हो जाएगी क्योंकि अधिक संख्या में डिफेंस सिस्टमों को तैनात किया जा सकेगा. भारत ने रूस से S400 खरीदने का सौदा करीब ₹400 करोड़ में किया था. प्रोजेक्ट कुशा के चलते महंगे हथियार खरीदने में लगने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी और सबसे बड़ी बात इस एयर डिफेंस सिस्टम को बेचकर विदेशी मुद्रा कमाने का मौका भी मिलेगा.