India Gold Imports 2026 : भारत में सोने के आयात में अगस्त 2026 के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सोने का आयात घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया। यह जुलाई के मुकाबले 45 प्रतिशत और पिछले साल अगस्त के मुकाबले 58 प्रतिशत कम था। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के अनुसार, इस दौरान भारत में करीब 15 से 20 टन सोना आया। सोने की खरीद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और बढ़ती कीमतों के बीच यह गिरावट चर्चा में है।
सरकार क्यों कम करना चाहती है सोने का आयात?
भारत दुनिया में सोने का बड़ा खरीदार है और हर साल विदेशों से बड़ी मात्रा में सोना मंगाता है। इससे देश को भारी रकम दूसरे देशों को चुकानी पड़ती है। ज्यादा आयात से व्यापार घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से सोना खरीदने में सावधानी बरतने की अपील कर चुके हैं। हालांकि, आयात में गिरावट के पीछे केवल यही कारण है, ऐसा कहना सही नहीं होगा। कीमतें और बाजार की मांग भी असर डालती हैं।
दिवाली पर पुराने गहनों से पूरी होगी मांग?
त्योहारों के मौसम में भारत में सोने और गहनों की खरीदारी बढ़ जाती है। लेकिन इस बार महंगे सोने के कारण कुछ ग्राहक नए गहने खरीदने के बजाय अपने पुराने गहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोग पुराने सोने को देकर नए डिजाइन के गहने बनवा रहे हैं। इससे ग्राहकों को नए सोने की पूरी कीमत नहीं चुकानी पड़ती। वहीं, ज्वेलरी कंपनियों को भी पुराने सोने को दोबारा इस्तेमाल करने का मौका मिल रहा है।
घरों में जमा है हजारों टन सोना
अनुमानों के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास कुल 25,000 से 50,000 टन तक सोना जमा हो सकता है। यह सोना गहनों, सिक्कों और दूसरी चीजों के रूप में रखा गया है। अब पुराने सोने को बदलकर नए गहने लेने का चलन बढ़ रहा है। इससे बाजार की मांग पूरी करने के लिए विदेशों से नया सोना मंगाने की जरूरत कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि, त्योहारों में कुल मांग कितनी रहेगी, यह ग्राहकों की खरीदारी पर निर्भर करेगा।
ये भी पढ़ें : 27 अक्टूबर से काउंटर टिकट पर भी मिलेगा बीमा! Supreme Court के निर्देश के बाद रेलवे में होगा बड़ा बदलाव
महंगा सोना खरीदना क्यों पड़ रहा है?
सितंबर 2026 में भारत में सोने की औसत कीमत 1,51,346 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई। यह जनवरी के मुकाबले 3.6 प्रतिशत ज्यादा थी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की औसत कीमत 4,324.7 डॉलर प्रति औंस रही। भारत में सोने की कीमत पर आयात शुल्क और रुपये की कीमत का भी असर पड़ता है। खबर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, आयात शुल्क में बढ़ोतरी और रुपये में गिरावट ने घरेलू बाजार में सोने की लागत बढ़ाई।
ज्वेलरी कंपनियों में एक्सचेंज का बढ़ा चलन
पुराने सोने के बदले नए गहने लेने का चलन ज्वेलरी कंपनियों के कारोबार में अहम हो गया है। खबर के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बड़ी संगठित ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री में पुराने और दोबारा इस्तेमाल किए गए सोने की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक रही। अगस्त में जॉयलुक्कास की कुल बिक्री में एक्सचेंज का हिस्सा करीब 73 प्रतिशत बताया गया, जबकि पिछले साल यह 57 प्रतिशत था। टाइटन और कल्याण ज्वेलर्स में भी पुराने सोने के इस्तेमाल का हिस्सा बढ़ा है। इससे इस त्योहारों के मौसम में सोने की मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है।