Heavy Equipment Manufacturing : भारत सरकार अब हेवी इक्विपमेंट सेक्टर में बड़ा कदम उठाने जा रही है। निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली महंगी मशीनों के लिए विदेशों, खासकर चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार करीब ₹11,484 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम लाने पर काम कर रही है। इस योजना का मकसद देश में हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और अगले सात वर्षों में बड़े निवेश को आकर्षित करना है।
किन मशीनों पर रहेगा फोकस
सरकार की प्रस्तावित योजना में टनल बोरिंग मशीन (TBM), फायर फाइटिंग सिस्टम, ऊंची इमारतों में लगने वाली लिफ्ट और अन्य भारी उपकरण शामिल हो सकते हैं। ये मशीनें मेट्रो, सुरंग, हाईवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बेहद जरूरी होती हैं। अभी इनका बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। सरकार चाहती है कि इनकी सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि प्रमुख पुर्जों का निर्माण भी भारत में हो।
TBM क्यों है सबसे अहम
टनल बोरिंग मशीन इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। मेट्रो रेल नेटवर्क, अंडरग्राउंड हाईवे और सुरंग निर्माण में इन मशीनों का इस्तेमाल होता है। भारत में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन घरेलू उत्पादन क्षमता सीमित होने की वजह से विदेशी कंपनियों पर निर्भरता बनी हुई है। सरकार इसी स्थिति को बदलना चाहती है ताकि बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी और आयात संबंधी समस्याओं से बचा जा सके।
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चीन से दूरी की बड़ी वजह
2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ा था। इसके बाद भारत ने चीनी निवेश और सरकारी खरीद में कई प्रतिबंध लगाए। वहीं चीन ने भी 2024 में टनल बोरिंग मशीनों के निर्यात नियम सख्त कर दिए। इसका असर भारत पर भी पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक भारत का टनलिंग मशीनरी आयात लगातार घटा है। ऐसे में सरकार अब रणनीतिक रूप से घरेलू उत्पादन बढ़ाकर किसी भी बाहरी निर्भरता को कम करना चाहती है।
किन कंपनियों को होगा फायदा
इस स्कीम से देश की कई बड़ी कंपनियों को लाभ मिलने की संभावना है। BEML पहले से भारत में टनल बोरिंग मशीन निर्माण की संभावनाओं पर काम कर रही है। इसके अलावा L&T और जॉनसन लिफ्ट्स जैसी कंपनियां भी इस योजना से फायदा उठा सकती हैं। इंसेंटिव मिलने से कंपनियां नई तकनीक, रिसर्च और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में निवेश कर सकेंगी। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
₹1 लाख करोड़ के बाजार पर नजर
भारत का कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट बाजार करीब ₹1 लाख करोड़ का माना जाता है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की संभावना है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। इससे न सिर्फ आयात पर खर्च घटेगा बल्कि भारत हेवी इक्विपमेंट निर्माण का एक बड़ा वैश्विक केंद्र भी बन सकता है। सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई ताकत देने वाली मानी जा रही है।