न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में जब भारत ने सिर्फ 6 रन पर 2 विकेट गंवा दिए थे, तब जीत की उम्मीद बहुत कम दिख रही थी। 209 रन का लक्ष्य और शुरुआती झटके ने दबाव बढ़ा दिया था। लेकिन यहीं से भारतीय टीम ने मैच की तस्वीर बदल दी। ईशान किशन की तूफानी बल्लेबाजी ने हालात पलट दिए और टीम इंडिया ने लगभग 5 ओवर पहले ही लक्ष्य हासिल कर लिया।
ईशान किशन की पारी ने बदला मैच का रुख
करीब दो साल बाद टीम में लौटे ईशान किशन ने तीसरे ओवर से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने सिर्फ 21 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया, जो न्यूजीलैंड के खिलाफ किसी भी भारतीय बल्लेबाज का सबसे तेज पचासा रहा। पावरप्ले में उन्होंने अकेले 56 रन बनाए और भारत को खराब शुरुआत से बाहर निकाला। उनकी पारी ने यह दिखा दिया कि खेल में हालात चाहे जैसे हों, जज्बा मैच जिता सकता है।
कप्तान के साथ साझेदारी और निर्णायक बढ़त
नंबर तीन पर उतरे ईशान ने कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ मिलकर सिर्फ 42 गेंदों में शतकीय साझेदारी की। हालांकि इस साझेदारी में ज्यादा रन ईशान के बल्ले से निकले। 32 गेंदों में 76 रन बनाकर वह आउट हुए, लेकिन तब तक जीत लगभग तय हो चुकी थी। इसके बाद बाकी बल्लेबाजों ने आसानी से लक्ष्य पूरा कर भारत को सीरीज में 2-0 की बढ़त दिला दी।
खेल भावना की मिसाल बनाम विवाद का रास्ता
जहां एक तरफ भारत और न्यूजीलैंड के बीच मैदान पर खेल भावना और मुकाबले की खूबसूरत तस्वीर दिखी, वहीं दूसरी तरफ टी20 विश्व कप 2026 को लेकर बांग्लादेश का फैसला सवालों में आ गया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर भारत में होने वाले विश्व कप से दूर रहने का संकेत खेल भावना के उलट माना जा रहा है। खेल का मकसद देशों को जोड़ना होता है, न कि राजनीतिक तनाव बढ़ाना।
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सुरक्षा नहीं, सियासत कारण?
भारत और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद दोनों ने बांग्लादेश के सुरक्षा संबंधी दावों को खारिज किया है। इसके बावजूद बांग्लादेश अपने फैसले पर अड़ा है। खेल जानकार मानते हैं कि यह फैसला खेल से ज्यादा मौजूदा भू-राजनीतिक हालात से जुड़ा है। अगर बांग्लादेश इस रास्ते पर चलता रहा, तो उसे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी साख भी गंवानी पड़ सकती है।
खिलाड़ी चाहते हैं खेल, फैसला बन रहा बोझ
इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात यह है कि बांग्लादेश के कुछ खिलाड़ी खुद भारत में खेलने के पक्ष में दिख रहे हैं। इससे साफ होता है कि खिलाड़ी खेलना चाहते हैं, लेकिन फैसले सियासी स्तर पर लिए जा रहे हैं। एक तरफ भारत जैसे मुकाबलों से यह साबित हो रहा है कि क्रिकेट अब भी लोगों को जोड़ता है, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश का रुख उसके लिए भारी पड़ सकता है।