India hits back at Pakistan: भारत ने छात्र प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान के कुछ युवा समूहों की ओर से जताए गए समर्थन पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर ध्यान देने के बजाय पाकिस्तान को अपने यहां से संचालित होने वाले सीमापार आतंकवाद को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मंत्रालय का कहना है कि आतंकवाद का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में सबसे गंभीर चुनौती बना हुआ है और इस दिशा में ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को दी स्पष्ट सलाह
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से भारत के खिलाफ सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद करे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मांग में देश के युवा वर्ग की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है और पड़ोसी देश को इस संदेश को गंभीरता से लेना चाहिए।
पाकिस्तान ने बताया भारत का आंतरिक मामला
भारत में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इसे भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी से इनकार किया। हालांकि, सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के कुछ युवाओं ने भारतीय प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताते हुए कई संदेश साझा किए। इन पोस्टों में दोनों देशों के साझा इतिहास और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया गया, जिससे यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया।
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सिंधु घाटी सभ्यता के दावे पर भी जवाब
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान की ओर से सिंधु घाटी सभ्यता को अपनी राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बताए जाने संबंधी दावों पर भी विदेश मंत्रालय से सवाल किया गया। इस पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि जो देश आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के मामलों में गंभीर सवालों का सामना कर रहा हो, वह किसी बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत पर विश्वसनीय दावा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के संरक्षण और सांस्कृतिक अधिकारों के प्रति कमजोर रिकॉर्ड ऐसे दावों को प्रभावहीन बना देता है।
सिंधु जल संधि और आतंकवाद का मुद्दा
हाल ही में पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने सिंधु घाटी सभ्यता को पाकिस्तान की पहचान का हिस्सा बताया था। यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमापार आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। भारत का कहना है कि आतंकवादी गतिविधियों ने दोनों देशों के बीच विश्वास को नुकसान पहुंचाया है और इसी संदर्भ में सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर भी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।