मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बावजूद देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने कहा है कि फिलहाल कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है। कंपनी के चेयरमैन एएस साहनी के मुताबिक अगस्त और सितंबर के अधिकांश समय तक पर्याप्त कच्चे तेल का स्टॉक और सप्लाई व्यवस्था मौजूद है, इसलिए तत्काल किसी बाधा की आशंका नहीं है।
खाड़ी देशों से ही जारी रहेगी खरीदारी
इंडियन ऑयल ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल खाड़ी देशों से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। कंपनी का कहना है कि भारत की कई रिफाइनरियां विशेष रूप से खाड़ी देशों के कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए बनाई गई हैं। इसके अलावा इन देशों से तेल लाने की परिवहन लागत भी अपेक्षाकृत कम पड़ती है, इसलिए फिलहाल खरीद रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
होर्मुज और रेड सी के लिए तैयार है वैकल्पिक रास्ता
कंपनी के अनुसार यदि रेड सी या होर्मुज क्षेत्र में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो सऊदी अरब से आने वाला कच्चा तेल 'केप ऑफ गुड होप' के समुद्री मार्ग से भारत लाया जाएगा। यह रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन इससे तेल की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी और ऊर्जा सुरक्षा पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा।
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नए दीर्घकालिक समझौतों पर फिलहाल रोक
वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए इंडियन ऑयल ने फिलहाल नए लंबे अवधि के तेल और गैस आपूर्ति समझौते नहीं करने का फैसला किया है। कंपनी अमेरिका के साथ नया एलपीजी समझौता भी अभी नहीं करेगी। हालांकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दो बड़े एलएनजी गैस कैरियर जहाज खरीदने की तैयारी की जा रही है, जिससे ऊर्जा आयात क्षमता और मजबूत होगी।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
इंडियन ऑयल का कहना है कि फिलहाल देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता पर कोई तत्काल असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि यदि मध्य-पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है या समुद्री मार्ग लगातार प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और परिवहन लागत में बढ़ोतरी का असर भविष्य में ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।