अगर आप सोचते हैं कि देश की सबसे बड़ी संपत्ति बैंकों या शेयर बाजार में है, तो यह सोच बदलने वाली खबर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के घरों में रखा सोना अब इतना ज्यादा हो चुका है कि उसकी कुल कीमत करीब 5 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 445 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है। यह आंकड़ा दिखाता है कि भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोना अब एक बहुत बड़ा आर्थिक खजाना बन चुका है, जो कई बड़े सेक्टर से भी आगे निकल गया है।
देश की जीडीपी से भी ज्यादा वैल्यू
इस सोने की खास बात यह है कि इसकी कुल वैल्यू देश की जीडीपी के करीब 125 प्रतिशत के बराबर है। यानी जितनी देश की पूरी अर्थव्यवस्था है, उससे भी ज्यादा मूल्य का सोना लोगों के घरों में रखा हुआ है। हाल के समय में सोने की कीमतों में तेजी आई है, जिसकी वजह से इसकी कुल वैल्यू में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। यही कारण है कि यह आंकड़ा अब एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
बैंक और शेयर बाजार से भी आगे निकला सोना
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में रखा सोना अब शेयर बाजार और बैंक जमा दोनों से आगे निकल चुका है। जहां शेयर बाजार की कुल वैल्यू करीब 420 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, वहीं बैंकों में जमा कुल रकम करीब 253 लाख करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले घरों में रखा सोना इन दोनों से काफी ज्यादा है। इससे साफ होता है कि लोग अपने पैसे को सोने के रूप में ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
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परिवारों की संपत्ति में बढ़ती हिस्सेदारी
भारतीय परिवारों की कुल गैर-संपत्ति दौलत में सोने की हिस्सेदारी अब करीब 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका मतलब यह है कि लोग अपनी बचत का बड़ा हिस्सा सोने में रख रहे हैं। यह आंकड़ा बैंक जमा और शेयरों की कुल वैल्यू से भी काफी ज्यादा है। पिछले कुछ वर्षों में सोने की तरफ लोगों का झुकाव तेजी से बढ़ा है और यह रुझान लगातार मजबूत होता जा रहा है।
पांच साल में चार गुना बढ़ा निवेश
रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में भारतीय परिवारों के पास सोने की कुल वैल्यू करीब 109 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 445 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यानी सिर्फ पांच साल में यह आंकड़ा चार गुना से ज्यादा बढ़ गया है। यह तेजी दिखाती है कि लोग सोने को एक भरोसेमंद निवेश मानते हैं और इसमें लगातार पैसा लगा रहे हैं।
अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर
हालांकि इस बढ़ते रुझान को लेकर कुछ चिंता भी जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार जब लोग ज्यादा सोना खरीदते हैं, तो वह बैंक में पैसा जमा करने की बजाय भौतिक संपत्ति में बदल जाता है। इससे देश की वित्तीय बचत कम हो सकती है। साथ ही भारत को सोना आयात करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में यह रुझान लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।