मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों पर दबाव बढ़ गया है। गैस संकट गहराने के बीच भारत ने करीब 8 साल बाद ईरान से LPG खरीदने का अहम फैसला लिया है। ‘Sea Bird’ नाम का जहाज इस गैस खेप को लेकर भारत पहुंच रहा है। यह कदम न सिर्फ तत्काल राहत देगा, बल्कि बदलते वैश्विक हालात में भारत की ऊर्जा रणनीति को भी दर्शाता है।
जंग का असर: भारत की रसोई तक पहुंचा संकट
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब सीधे भारत के आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। LPG की आपूर्ति प्रभावित होने से कई जगह गैस की किल्लत बढ़ गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ क्षेत्रों में लोगों को वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है, जबकि कई स्थानों पर सिलेंडर के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
8 साल बाद ईरान से गैस की खरीद
सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation ने करीब 43 हजार टन LPG की खरीद की है, जिसमें Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum भी साझेदार हैं। यह डील इसलिए खास है क्योंकि भारत ने आखिरी बार जून 2018 में ईरान से LPG खरीदी थी। अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद यह व्यापार लगभग बंद हो गया था।
होर्मुज संकट से टूटी सप्लाई चेन
Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसमें से अधिकांश सप्लाई इसी क्षेत्र से आती है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग में बाधा आने से देश की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ा है।
Sea Bird’ से मिलेगी राहत
‘Sea Bird’ नाम का जहाज इस LPG खेप को लेकर मंगलुरु पोर्ट पहुंच रहा है। खास बात यह है कि यह जहाज पहले चीन की ओर जा रहा था, लेकिन बीच रास्ते से दिशा बदलकर भारत की ओर मोड़ दिया गया। हालांकि यह खेप देश की आधे दिन की जरूरत ही पूरी कर पाएगी, फिर भी मौजूदा संकट में इसे बड़ी राहत माना जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा की नई रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। वैश्विक हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक ही क्षेत्र पर निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है। भारत अब अपने स्रोतों में विविधता लाने और आपात स्थितियों के लिए तैयार रहने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।