भारत ने इस महीने चीन से आने वाले दो प्रमुख उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाकर बड़ा कदम उठाया है। इनमें रेफ्रिजरेंट गैस और कुछ खास तरह के स्टील उत्पाद शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन उत्पादों को भारत में उनकी सामान्य कीमत से काफी कम दाम पर बेचा जा रहा था, जिससे घरेलू कंपनियों को नुकसान हो रहा था। इसी को रोकने के लिए भारत ने यह सख्त फैसला लिया है। इस कदम को घरेलू उद्योगों के हित में जरूरी माना जा रहा है।
स्टील और गैस पर कितनी ड्यूटी
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, चीन की कुछ कंपनियों से आने वाले स्टील उत्पादों पर 223.82 डॉलर प्रति टन और कुछ अन्य कंपनियों पर 415 डॉलर प्रति टन तक की एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है। यह शुल्क पांच साल तक लागू रहेगा। वहीं, रेफ्रिजरेंट गैस R-134a पर 5,251 डॉलर प्रति टन तक की भारी ड्यूटी भी अगले पांच वर्षों के लिए तय की गई है। इसका सीधा असर इन उत्पादों की कीमत और आयात पर पड़ेगा।
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जांच के बाद लिया गया फैसला
यह फैसला वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) की सिफारिश के बाद लिया गया है। DGTR ने अलग-अलग जांच में पाया कि सस्ते आयात की वजह से भारतीय उद्योगों को नुकसान हो रहा है। इसी तरह, वियतनाम से आने वाले ‘कैल्शियम कार्बोनेट फिलर मास्टरबैच’ पर भी एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया गया है, जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर होता है।
डंपिंग क्या है और क्यों जरूरी है टैक्स
जब कोई देश अपने उत्पादों को दूसरे देश में घरेलू कीमत से बहुत कम दाम पर बेचता है, तो उसे डंपिंग कहा जाता है। इससे स्थानीय कंपनियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पातीं और बाजार प्रभावित होता है। अमेरिका द्वारा ऊंचे टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन जैसे देशों से भारत में डंपिंग बढ़ी है। ऐसे में एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाकर भारत WTO के नियमों के तहत निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना चाहता है और घरेलू उद्योगों को बराबरी का मौका देना चाहता है।