मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत की रणनीतिक स्थिति और उसके पुराने रिश्ते एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। ऊर्जा संकट और वैश्विक तनाव के बीच पूर्व खुफिया प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने न सिर्फ ईरान की संभावित बढ़त की बात कही, बल्कि भारत-ईरान संबंधों की गहराई को भी रेखांकित किया।
जंग के बीच आया बड़ा बयान
पूर्व RAW प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत ने मौजूदा हालात को चिंताजनक बताते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष में ईरान की स्थिति मजबूत नजर आ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं होता।
भारत पर ऊर्जा संकट का खतरा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर सीधे भारत पर पड़ रहा है। तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। भारत लंबे समय तक ईरान से कच्चा तेल आयात करता रहा है, ऐसे में इस जंग का असर घरेलू अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
भारत-ईरान के ऐतिहासिक संबंध
भारत और ईरान के रिश्ते दशकों पुराने हैं। आजादी के बाद दोनों देशों ने कूटनीतिक संबंध स्थापित किए और समय के साथ सहयोग बढ़ाया। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद भी भारत ने संतुलित नीति अपनाते हुए ईरान और पश्चिमी देशों के बीच अपने संबंध बनाए रखे।
चाबहार पोर्ट: रणनीतिक कनेक्शन
चाबहार बंदरगाह भारत-ईरान संबंधों का अहम स्तंभ है। इस परियोजना के जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा पहुंच मार्ग मिलता है। यह पोर्ट भारत की रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
INSTC से बढ़ेगा व्यापार और कनेक्टिविटी
इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) एक बड़ा प्रोजेक्ट है, जो भारत, ईरान और रूस को जोड़ता है। इससे व्यापार तेज और सस्ता होगा, साथ ही भारत की वैश्विक पहुंच मजबूत होगी। मौजूदा हालात में यह कॉरिडोर और भी अहम हो गया है।