सीरीज शुरू होने से पहले ही प्लेइंग इलेवन को लेकर असमंजस बना रहा। लगातार बदलाव और प्रयोग का असर मैदान पर भी दिखा। जब टीम अपनी सर्वश्रेष्ठ संयोजन तय नहीं कर पाती, तो प्रदर्शन पर उसका असर पड़ना तय माना जाता है।
ओपनिंग और मिडिल ऑर्डर दोनों रहे फ्लॉप
दोनों मुकाबलों में भारतीय सलामी बल्लेबाज अच्छी शुरुआत नहीं दिला सके। इसका दबाव सीधे मिडिल ऑर्डर पर आया, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रन बनाने में नाकाम रहा। आईपीएल में आक्रामक बल्लेबाजी करने वाले कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके।
बुमराह का विकल्प अब भी नहीं मिला
वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते जसप्रीत बुमराह टीम में नहीं थे, लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में नई गेंद और डेथ ओवरों में असरदार गेंदबाजी करने वाला विकल्प भी नजर नहीं आया। इससे तेज गेंदबाजी विभाग की तैयारी पर सवाल खड़े हुए।
स्पिन विभाग भी नहीं बना मैच विनर
बीच के ओवरों में विकेट निकालने वाला विशेषज्ञ स्पिनर टीम के पास नहीं दिखा। स्पिन ऑलराउंडर मौजूद रहे, लेकिन कोई भी विपक्षी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव नहीं बना सका। आधुनिक टी20 क्रिकेट में यह कमजोरी महंगी साबित हुई।
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वैभव बहस का हिस्सा, पूरी वजह नहीं
15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को मौका न मिलना चर्चा का विषय जरूर बना, लेकिन पूरी हार को सिर्फ उसी फैसले से जोड़ना सही नहीं होगा। बल्लेबाजी, गेंदबाजी, टीम चयन और रणनीति जैसी कई कमियां इस सीरीज में साफ नजर आईं। इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अगली चुनौती से पहले भारतीय टीम को इन कमजोरियों पर तेजी से काम करना होगा।