
भारत स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। वह अब तीसरे पायदान पर पहुंच चुका है। इसके साथ देश पवन ऊर्जा में विश्व का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। यह जानकारी मंगलवार को सरकार की ओर से दी गई। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) के हवाले से जानकारी दी कि देश स्थापित अक्षय ऊर्जा के मामले में विश्व में चौथे स्थान पर है। वहीं पवन ऊर्जा में चौथे और सौर ऊर्जा में तीसरे स्थान पर है।
विद्युत क्षमता 484.82 गीगावाट
सरकार के बयान के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 1,08,494 गीगावाट घंटा सौर ऊर्जा का उत्पादन किया। जापान के 96,459 गीगावाट घंटा से ज्यादा है। इस दौरान देश की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 38 गीगावाट से बढ़कर 74 गीगावाट हो चुकी है। भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 484.82 गीगावाट में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान अब 50.07 प्रतिशत पर पहुंच चुका है। यह लक्ष्य सीओपी 26 की प्रतिबद्धता है। इसे भारत ने तय वक्त से पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया है।
सौर संयंत्र क्षमता 90.99 गीगावाट
भारत की संचयी सौर ऊर्जा क्षमता जलाई 2025 तक 119.02 गीगावाट थी। इसमें जमीन पर स्थापित सौर संयंत्र क्षमता 90.99 गीगावाट, ग्रिड से जड़े रूफटॉप सिस्टम की क्षमता 19.88 गीगावाट है। हाइब्रिड परियोजनाओं से 3.06 गीगावाट की क्षमता है। ऑफग्रिड सौर प्रतिष्ठानों से 5.09 गीगावाट की क्षमता होती है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तान के लिए देश के विविध दृष्टिकोण को दर्शाता है।
सरकार के तहत भारत उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित है। यहां कर्क रेखा कई राज्यों से होकर गुजरती है। इससे देश में सौर ऊर्जा उत्पादन की आपार संभावनाएं हैं। भारतीय महाद्वीप की कुल सौर ऊर्जा क्षमता 748 गीगावाट है। राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र , मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में देश की सबसे ज्यादा सौर ऊर्जा क्षमता है।