भारत और दक्षिण कोरिया के बीच डिजिटल भुगतान को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के यहां यात्रा के दौरान QR कोड के जरिए आसानी से भुगतान कर सकेंगे। नरेंद्र मोदी और ली जे म्युंग की मौजूदगी में यह कदम उठाया गया, जिससे व्यापारियों, पर्यटकों और आम लोगों को काफी सुविधा मिलेगी।
तकनीक और उद्योग में साझेदारी
दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज शुरू किया जाएगा। इसके अलावा जहाज निर्माण, इस्पात, बंदरगाह और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भी कई समझौते हुए हैं। इससे दोनों देशों के औद्योगिक संबंध और मजबूत होंगे और नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। फिलहाल यह आंकड़ा करीब 27 अरब डॉलर है। व्यापार को आसान बनाने के लिए फाइनेंशियल फोरम और इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन कमेटी बनाई गई है। इसके साथ ही आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए नए संवाद भी शुरू किए जाएंगे।
सांस्कृतिक रिश्तों को भी मिलेगा बढ़ावा
दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। भारत में के-पॉप और के-ड्रामा की लोकप्रियता बढ़ रही है, वहीं दक्षिण कोरिया में भारतीय सिनेमा की पहचान मजबूत हो रही है। इसी को देखते हुए 2028 में भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप फेस्टिवल आयोजित करने की योजना बनाई गई है, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बढ़ेगा।
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भविष्य की साझेदारी पर जोर
इस बैठक में दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की। ली जे म्युंग ने भारत को ग्लोबल साउथ का नेता बताया और उसके विकास की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश मिलकर भविष्य की साझेदारी को और मजबूत बनाएंगे। इस समझौते से साफ है कि आने वाले समय में भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्ते नई ऊंचाइयों तक पहुंचने वाले हैं।