वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में भारत सरकार ने समय रहते एक अहम फैसला लिया है। सरकार एलएनजी खरीद के लिए करीब 600 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर रही है। इसका मकसद यह है कि जरूरत पड़ने पर तुरंत गैस खरीदी जा सके और देश में उर्वरक बनाने वाले प्लांट्स को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। एक्सपर्ट मानते हैं कि यह कदम संभावित संकट से बचाव के लिए पहले से की गई तैयारी है।
उर्वरक उत्पादन क्यों है इतना अहम
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में उर्वरक उत्पादन बहुत जरूरी होता है। गैस इसकी सबसे अहम जरूरत होती है। अगर गैस की सप्लाई कम होती है, तो इसका असर सीधे खेती पर पड़ता है। किसानों को समय पर खाद नहीं मिलती और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फंड तैयार करने का फैसला लिया है, ताकि अचानक किसी भी तरह की कमी को तुरंत पूरा किया जा सके और उत्पादन लगातार चलता रहे।
होर्मुज रास्ते ने बढ़ाई चिंता
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर अनिश्चितता बढ़ गई है। यह मार्ग दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो गैस और तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट के अनुसार अगर यह तनाव लंबे समय तक चलता है, तो गैस की उपलब्धता में बड़ी गिरावट आ सकती है और बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
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महंगी हो सकती है गैस और उत्पादन
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि एशिया में एलएनजी की कीमतों में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे गैस खरीदना महंगा हो जाएगा और उत्पादन लागत भी बढ़ेगी। हालांकि सरकार का यह फंड इसी स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर स्पॉट मार्केट से तुरंत गैस खरीदकर सप्लाई को संतुलित रखा जा सकेगा, जिससे प्लांट्स को बंद होने से बचाया जा सकेगा।
उद्योग और किसानों को मिलेगा सहारा
भारत के कई यूरिया प्लांट्स अपनी गैस जरूरत का हिस्सा स्पॉट मार्केट से भी पूरा करते हैं। अगर सप्लाई में कमी आती है, तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है। सरकार अब पहले से तैयारी कर रही है, ताकि प्लांट्स को किसी तरह की परेशानी न हो। एक्सपर्ट के अनुसार इससे किसानों को समय पर खाद मिलती रहेगी और कृषि क्षेत्र पर किसी बड़े संकट का खतरा नहीं होगा।
खरीफ सीजन से पहले रणनीति तैयार
खरीफ सीजन के दौरान उर्वरक की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में अगर गैस की सप्लाई प्रभावित होती है, तो हालात गंभीर हो सकते हैं। सरकार इस स्थिति से बचने के लिए पहले से तैयारी कर रही है। इस कदम से न केवल उत्पादन बना रहेगा, बल्कि बाजार में कीमतों का असर भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे आम लोगों और किसानों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।