अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबर ने भारत समेत दुनिया के कई देशों को राहत दी है। इस समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलने की तैयारी में है। इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिल सकता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करता है। इसी बीच भारत का LNG टैंकर ‘दिशा’ तीन महीने से ज्यादा समय बाद इस मार्ग की ओर बढ़ता दिखाई दिया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
कहां पहुंचा है टैंकर ‘दिशा’?
शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ‘दिशा’ नाम का LNG टैंकर फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के उत्तर में और ओमान के करीब पहुंच चुका है। यह जहाज भारत की एक सरकारी आयातक कंपनी द्वारा लंबी अवधि की लीज पर लिया गया है। बताया जा रहा है कि इसने मार्च की शुरुआत में कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से गैस की खेप लोड की थी। अब होर्मुज के खुलने की संभावना के बीच यह आगे बढ़ने वाला पहला भारतीय टैंकर माना जा रहा है।
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दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। फरवरी के अंत में क्षेत्रीय तनाव और सैन्य कार्रवाइयों के बाद यह मार्ग लगभग बंद हो गया था, जिससे ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई थी। अब शांति समझौते के बाद इस कॉरिडोर से आवाजाही फिर शुरू होने की उम्मीद है। इससे दुनिया भर के आयातकों, ऊर्जा कंपनियों और व्यापारिक बाजारों को राहत मिलेगी। गैस और तेल की सप्लाई सामान्य होने से कीमतों पर भी दबाव कम हो सकता है।
राहत के साथ चुनौतियां भी बरकरार
हालांकि होर्मुज के खुलने की खबर सकारात्मक है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। कई जहाज सुरक्षा कारणों से अपनी लोकेशन छिपाकर चलते रहे हैं और कुछ ने अपने ट्रांसपोंडर भी बंद कर रखे हैं। ऐसे में समुद्री गतिविधियों की सटीक निगरानी करना आसान नहीं है। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि LNG और कच्चे तेल की सप्लाई दोबारा शुरू होने से यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट का दबाव कम होगा। इसका असर तेल बाजार पर भी दिखा है, जहां ब्रेंट क्रूड की कीमतों में शुरुआती कारोबार में 4 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।