रायपुर वनडे में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट के नुकसान पर 358 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। विराट कोहली और ऋतुराज गायकवाड़ के शतक ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया था। लेकिन जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने 49.2 ओवर में 6 विकेट पर 362 रन बनाकर चौंका देने वाली जीत दर्ज कर ली। यह हार इसलिए और बड़ी मानी जा रही है क्योंकि 350+ स्कोर के बाद भारत शायद ही कभी मैच गंवाता है। फैंस के मन में सिर्फ एक ही सवाल इतना बड़ा लक्ष्य होते हुए भी मैच कैसे हाथ से निकल गया?
भारतीय फील्डिंग बनी सबसे बड़ी कमजोरी
रायपुर में भारत की फील्डिंग पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई। यशस्वी जायसवाल ने एडेन मार्करम का आसान कैच तब टपकाया जब वह सिर्फ 53 रन पर थे। बाद में मार्करम ने 110 रन ठोककर भारत का मैच बिगाड़ दिया। रवींद्र जडेजा भी दो मौकों पर फील्डिंग में चूक गए जिससे दक्षिण अफ्रीका को अतिरिक्त रन मिले। कुछ रनआउट अवसर भी गंवाए गए। इन गलतियों ने दक्षिण अफ्रीका का आत्मविश्वास बढ़ा दिया और भारत की पकड़ ढीली पड़ती चली गई। एक तरह से कहा जाए तो फील्डिंग की ये चूकें भारत की हार की असली जड़ बन गईं।
गेंदबाजों ने निराश किया, ओस ने और मुश्किल बढ़ाई
मैच की दूसरी पारी में ओस ने गेंदबाजों का काम बेहद कठिन बना दिया। गेंद हाथ से फिसल रही थी, स्पिन नहीं हो रही थी और लैंग्थ पर कंट्रोल लगभग खत्म हो गया था। प्रसिद्ध कृष्णा ने 85 रन देकर दो विकेट लिए, हर्षित राणा ने 70 और कुलदीप यादव ने 78 रन लुटाए। जडेजा और सुंदर विकेट नहीं ले सके। सिर्फ अर्शदीप सिंह थोड़े प्रभावी नजर आए। दूसरी तरफ ब्रेविस ने 34 गेंद में 54 रन ठोककर भारत की गेंदबाजी की कमर ही तोड़ दी। गेंदबाजों की यह नाकामी बड़े लक्ष्य के बावजूद मैच को भारत से दूर ले गई।
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आखिरी 10 ओवरों ने पलट दिया पूरा समीकरण
भारत की बैटिंग भी पूरी तरह परफेक्ट नहीं रही। 40 ओवर के बाद भारत 284/4 पर था और लग रहा था कि टीम 380 के पार जाएगी। लेकिन आखिरी 60 गेंदों में सिर्फ 74 रन आए। इस धीमी रफ्तार ने टीम को 20–25 रन कम देकर छोड़ा, जो बाद में भारी पड़े। मैच जिताने लायक स्थिति होने के बावजूद भारत बड़ा स्कोर खड़ा करने का मौका चूक गया और दक्षिण अफ्रीका ने उसी कमी का फायदा उठाया। अगर अंतिम ओवरों की गति तेज होती, तो मैच का नतीजा बिल्कुल अलग हो सकता था।