मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी सैन्य रणनीति को नई दिशा दी। इस ऑपरेशन ने भविष्य के युद्ध की जरूरतों को स्पष्ट कर दिया—ड्रोन, मिसाइल, एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर अब युद्ध का केंद्र बन चुके हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अगले एक साल में भारत ने अपने वेपन सिस्टम को तेज़ी से मजबूत किया।
क्यों बढ़ी रक्षा खरीद की रफ्तार
ऑपरेशन के दौरान आधुनिक हथियारों की भूमिका ने यह साफ कर दिया कि भविष्य के संघर्ष हाई-टेक होंगे। इसी के चलते डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने जुलाई 2025 में करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये के बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। साथ ही इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत तेज़ खरीद प्रक्रिया अपनाई गई।
एक साल में शामिल किए गए नए हथियार सिस्टम
मई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत ने 15-20 बड़े वेपन सिस्टम अपनी सेना में जोड़े। इनमें प्रमुख हैं:
पिनाका रॉकेट सिस्टम: दो नई रेजिमेंट और लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का परीक्षण
AH-64E Apache: टैंक और बंकर नष्ट करने में सक्षम आधुनिक हेलीकॉप्टर
ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन: करीब 850 कामिकेज ड्रोन और एडवांस सर्विलांस सिस्टम
एयर डिफेंस सिस्टम: S-400, QRSAM और VSHORAD जैसी मिसाइलें
वायुसेना के लिए: Tejas Mk-1A के 97 जेट, AEW&C सिस्टम और नई मिसाइल तकनीक
नौसेना के लिए: माइन काउंटर मेजर वेसल, ऑटोनॉमस सरफेस क्राफ्ट और हाई-टेक कम्युनिकेशन सिस्टम
अन्य हथियार: एंटी-टैंक मिसाइल, प्रिसिजन आर्टिलरी शेल्स और स्पाई एयरक्राफ्ट
किन हथियारों को किया गया मॉडर्नाइज
नए सिस्टम के साथ-साथ 8-10 मौजूदा प्लेटफॉर्म को भी अपग्रेड किया गया:
Su-30MKI: एडवांस रडार और नए हथियार इंटीग्रेशन
T-90 Tank: बेहतर नाइट साइट और फायर कंट्रोल
BrahMos: नेवी के लिए अपग्रेडेड लॉन्च सिस्टम
Mi-17 Helicopter: लाइफ एक्सटेंशन और टेक्नोलॉजी अपडेट
बराक-1 और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम: अपग्रेडेड इंटरसेप्शन क्षमता
पिनाका और रडार सिस्टम: एक्सटेंडेड रेंज और बेहतर टारगेटिंग
आत्मनिर्भरता पर सबसे ज्यादा फोकस
इस पूरे बदलाव में खास बात यह रही कि ज्यादातर सिस्टम स्वदेशी या जॉइंट वेंचर के तहत विकसित किए गए। BrahMos, Pinaka और Tejas जैसे प्लेटफॉर्म अब वैश्विक स्तर पर भी पहचान बना रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद का एक साल भारत की सैन्य तैयारी के लिए निर्णायक साबित हुआ। नए हथियारों की एंट्री और पुराने सिस्टम के अपग्रेड से तीनों सेनाओं की ताकत कई गुना बढ़ी है। यह बदलाव भविष्य के किसी भी संघर्ष में भारत को अधिक सक्षम और तैयार बनाता है।