भारत में स्मार्ट सिटी योजना की शुरुआत भले ही 2015 में हुई हो, लेकिन योजनाबद्ध, सुविधाजनक और आधुनिक जीवनशैली का उदाहरण लगभग 180 साल पहले ही तैयार हो चुका था। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का नौगांव शहर ब्रिटिश काल में बसाया गया था और इसे एक सुव्यवस्थित, सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया। यह नगर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि इतिहास, बहादुरी और शहरी योजना का जीवंत उदाहरण है।
स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नौगांव की नींव 1842 में ब्रिटिश शासन ने रखी। उद्देश्य था बुंदेलखंड की स्वतंत्रता को दबाना और जैतपुर के महाराजा परीक्षित को हराना। राजा परीक्षित की ‘नागफनी’ तोप ने अंग्रेजों की कैथा चौकी तबाह कर दी, जिसके बाद अंग्रेजों ने नौगांव को अपना सैन्य अड्डा बनाया।
योजनाबद्ध विकास और सुविधाएं
यह छावनी धीरे-धीरे 192 चौराहों और आपस में जुड़ी सड़कों वाला एक खूबसूरत नगर बनी। ब्रिटिशों ने इसे केवल सैन्य केंद्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे व्यापार, संस्कृति और प्रशासन का केंद्र बनाया। ग्वाले, दर्जी, व्यापारी—सभी को यहां बसाया गया।
बुंदेलखंड का राजनीतिक केंद्र
नौगांव बुंदेलखंड की 36 रियासतों का प्रशासनिक केंद्र रहा। पन्ना, अजयगढ़, दतिया, ओरछा जैसी रियासतों के कामकाज यहीं से चलते थे। 36 भव्य बंगले रियासतों के राजाओं के ठहरने के लिए बनाए गए।
स्वतंत्रता के बाद का सफर
15 अगस्त 1947 के बाद नौगांव विंध्य प्रदेश की राजधानी बना और कामता प्रसाद सक्सेना पहले मुख्यमंत्री बने। यहां की ब्रिटिशकालीन धरोहरें—आर्मी चर्च, पुरानी जेल, सचिवालय—आज भी इतिहास की गूंज सुनाती हैं।