India-New Zealand: भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हुए, जिसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते में व्यापार, निवेश, कानूनी ढांचे और विवाद समाधान समेत 20 अहम अध्याय शामिल हैं, जो आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देंगे।
सिर्फ 9 महीनों में तैयार हुआ समझौता
पीयूष गोयल ने बताया कि यह समझौता महज 9 महीनों में पूरा हुआ, जो दोनों देशों के बीच भरोसे और तेजी से आगे बढ़ती साझेदारी को दर्शाता है। उन्होंने इसे “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
इस FTA के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा। साथ ही भारत के सभी निर्यात उत्पादों पर न्यूजीलैंड में 100% ड्यूटी खत्म कर दी जाएगी, जिससे भारतीय कंपनियों को बड़ा बाजार मिलेगा। भारत ने भी अपनी 70% टैरिफ लाइन्स न्यूजीलैंड के लिए खोल दी हैं।
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रोजगार और वीजा के नए अवसर
समझौते के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल कम से कम 5,000 वीजा दिए जाएंगे, जिससे वे न्यूजीलैंड में तीन साल तक काम कर सकेंगे। इससे युवाओं, स्टार्टअप और स्किल्ड वर्कर्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के अवसर मिलेंगे।
किसानों और उद्योगों को फायदा
नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह समझौता किसानों, MSME, कारीगरों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोलेगा। टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग उत्पाद बिना ड्यूटी न्यूजीलैंड जाएंगे, जबकि न्यूजीलैंड को ऊन, वाइन, लकड़ी और फलों के निर्यात में लाभ होगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा और भारतीय किसानों को नई तकनीक और फसलों के उत्पादन में मदद मिलेगी।