भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे इंतजार के बाद आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर मुहर लग गई है। 27 अप्रैल 2026 को हुए इस ऐतिहासिक समझौते से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में नया अध्याय जुड़ गया है। इस डील से निवेश, व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा होंगे। खासतौर पर भारतीय युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए विदेश में काम करने के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
वर्षों की बातचीत के बाद बनी सहमति
इस समझौते की नींव साल 2010 में रखी गई थी, लेकिन कई दौर की बातचीत के बाद 2015 में यह प्रक्रिया रुक गई थी। मार्च 2025 में बातचीत दोबारा शुरू हुई और आखिरकार दिसंबर में इसे अंतिम रूप देकर अप्रैल 2026 में साइन किया गया।
निवेश और रोजगार के नए अवसर
इस डील के तहत अगले 15 वर्षों में करीब 20 अरब डॉलर का निवेश भारत में आने की संभावना है। साथ ही न्यूजीलैंड 5000 भारतीयों को वर्किंग वीजा देगा, जिससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का मौका मिलेगा।
कई सेक्टर्स को मिलेगा सीधा फायदा
आईटी, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, हेल्थ और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए यह समझौता खास अवसर लेकर आया है। इसके अलावा योग प्रशिक्षक, आयुष विशेषज्ञ, शेफ और संगीत शिक्षकों को भी विदेश में अपनी पहचान बनाने का मौका मिलेगा।
व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सेक्टर को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना ड्यूटी के प्रवेश मिलेगा। वहीं न्यूजीलैंड को भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार में अपनी पहुंच मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
संवेदनशील सेक्टर्स को रखा गया सुरक्षित
भारत ने अपने किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए डेयरी, चीनी और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को इस डील से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना है।