27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस मौके पर पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे। यह डील महज 9 महीने में पूरी हुई है, जो इसे भारत के सबसे तेज व्यापार समझौतों में शामिल करती है।
भारत को मिलेगा बड़ा आर्थिक फायदा
इस समझौते के लागू होते ही भारत के 8,284 उत्पादों को न्यूजीलैंड में टैक्स फ्री एंट्री मिलेगी। इससे टेक्सटाइल, चमड़ा, ऑटोमोबाइल और फर्निशिंग जैसे सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। खासतौर पर उत्तर प्रदेश का आगरा, जो जूता उत्पादन का बड़ा केंद्र है, उसे बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। अनुमान है कि 2030 तक निर्यात 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
फार्मा और कृषि सेक्टर को बढ़ावा
भारत के फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को भी न्यूजीलैंड के बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही कृषि उत्पाद जैसे फल, सब्जियां, मसाले और अनाज पर भी शून्य शुल्क लागू होगा। इससे किसानों और छोटे उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और निर्यात में तेजी आएगी।
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न्यूजीलैंड को भी होंगे फायदे
इस डील से न्यूजीलैंड को भी बड़ा फायदा मिलेगा। वहां के ऊन, फल, शहद और लकड़ी जैसे उत्पादों को भारत में बेहतर बाजार मिलेगा। साथ ही बागवानी, मत्स्य पालन और डेयरी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा। किवी, सेब और ब्लूबेरी जैसे उत्पादों की भारत में मांग बढ़ने की संभावना है।
निवेश और रोजगार के नए अवसर
समझौते के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में होगा। इसके अलावा भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल 1,667 वीजा की सुविधा भी दी जाएगी। इस समझौते का लक्ष्य दोनों देशों के बीच व्यापार को 5 साल में दोगुना करना है, जिससे रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।