दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में भारत की परमाणु क्षमताओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुछ परमाणु हथियार अब परिचालन तैनाती की स्थिति में हैं। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान ने चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले पर ध्यान देने की अपील की है।
SIPRI रिपोर्ट में क्या कहा गया?
SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास लगभग 190 परमाणु वॉरहेड मौजूद हैं। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि इनमें से कुछ हथियारों को पहली बार परिचालन तैनाती (Operational Deployment) की श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका अर्थ यह है कि भारत अपनी रणनीतिक तैयारियों और प्रतिरोधक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
‘कैनिस्टराइजेशन’ तकनीक पर पाकिस्तान की चिंता
रिपोर्ट सामने आने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं पर चिंता व्यक्त की। विशेष रूप से भारतीय मिसाइलों में इस्तेमाल की जा रही “कैनिस्टराइजेशन” तकनीक का उल्लेख किया गया। इस तकनीक के तहत मिसाइलों को पहले से तैयार और सुरक्षित कंटेनर में रखा जाता है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर उन्हें कम समय में लॉन्च किया जा सकता है।
समुद्र से लेकर जमीन तक मजबूत हुई क्षमता
पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने परमाणु-सक्षम पनडुब्बियों, लंबी दूरी की मिसाइलों और समुद्र आधारित प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत किया है। इससे भारत की त्रि-आयामी परमाणु क्षमता (जमीन, हवा और समुद्र) पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है। पाकिस्तान इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की अपील
इस्लामाबाद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बनाए रखने के लिए स्थिति पर नजर रखने की अपील की है। पाकिस्तान का मानना है कि क्षेत्र में हथियारों की बढ़ती क्षमता सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ा सकती है।
भारत की रणनीति पर विशेषज्ञों की राय
कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी घोषित “नो फर्स्ट यूज” नीति पर कायम है और उसकी रणनीति मुख्य रूप से प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत की सैन्य तैयारियों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखा जा रहा है।