India Oil Basket : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित जहाजरानी के बीच भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ी है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार भारत का कच्चा तेल बास्केट 106.75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। जुलाई में यही कीमत करीब 82 डॉलर प्रति बैरल थी, यानी महज डेढ़ महीने में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
होर्मुज में कम हुई जहाजों की आवाजाही
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिखाई दे रहा है। शिपिंग आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 दिनों में यहां से औसतन केवल 10 मालवाहक जहाज प्रतिदिन गुजर पाए हैं। यह मई के बाद सबसे कम स्तर माना जा रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी लागत?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर आयात लागत पर पड़ता है। अगस्त में भारतीय बास्केट का औसत भाव 90.19 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि जुलाई में यह 82.04 डॉलर और जून में 83.22 डॉलर प्रति बैरल रहा था।
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वैश्विक बाजार में भी तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। निवेशक मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि किसी भी बड़े व्यवधान से कीमतों में और तेजी आ सकती है।
पेट्रोल-डीजल पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो तेल विपणन कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि फिलहाल कंपनियों या सरकार की ओर से किसी मूल्य वृद्धि की घोषणा नहीं की गई है।
तनाव बढ़ने से बढ़ी आशंका
स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है। इसके अलावा यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमलों की खबरों ने क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा दिया है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारतीय उपभोक्ताओं दोनों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।