भारत पर ‘तेल मुनाफाखोरी’ का आरोप, रूस से आयात 42% तक पहुंचा
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भारत पर ‘तेल मुनाफाखोरी’ का आरोप, रूस से आयात 42% तक पहुंचा
लोकसत्य
बुधवार, 20 अगस्त 2025 • 12:26 pm
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भारत की ऊर्जा रणनीति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि भारत ने युक्रेन युद्ध के दौरान रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदकर उसे दोबारा बेचने से भारी मुनाफा कमाया। पहले जहां रूस का भारत की तेल सप्लाई में हिस्सा नगण्य था, वहीं अब यह 42% तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस प्रक्रिया से करीब 16 अरब डॉलर का अतिरिक्त लाभ कमाया है। इसे कई देशों ने महज ‘मुनाफाखोरी’ करार दिया है।
भारत पर सवाल क्यों उठे?
युक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदा और उसे प्रोसेस कर वैश्विक बाजारों में बेचा. पहले जहां भारत की तेल सप्लाई में रूस की हिस्सेदारी 1% से भी कम थी, वहीं अब यह बढ़कर 42% तक पहुंच चुकी है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस खरीद-फरोख्त से भारत को लगभग 16 अरब डॉलर का अतिरिक्त लाभ हुआ है. आलोचकों का कहना है कि यह कदम केवल मुनाफाखोरी पर आधारित है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.
चीन को क्यों मिली राहत?
भारत पर सवाल उठने के साथ यह भी पूछा गया कि चीन पर वैसा दबाव क्यों नहीं डाला जा रहा. इसका जवाब यह दिया गया कि चीन पहले से ही रूस पर निर्भर था. युद्ध से पहले चीन के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 13% थी, जो अब बढ़कर केवल 16% हुई है. यानी चीन ने आयात में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की और अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई.
विवाद गहराने की आशंका
भारत को लेकर उठे आरोप अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए विवाद को जन्म दे सकते हैं. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता भविष्य में दबाव का कारण बन सकती है. वहीं, चीन की स्थिति को ‘संतुलित’ बताकर उसे राहत दी गई है. इससे साफ है कि वैश्विक राजनीति में ऊर्जा व्यापार अब रणनीतिक बहस का अहम हिस्सा बन चुका है.