भारत अब ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा रणनीतिक कदम उठाने जा रहा है। ओमान से भारत तक समुद्र के भीतर लगभग 4000 किलोमीटर लंबी अंडरसी गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत को खाड़ी देशों से सीधे और स्थायी प्राकृतिक गैस सप्लाई उपलब्ध कराना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय तनाव या समुद्री मार्ग बाधित होने की स्थिति में देश को ऊर्जा संकट का सामना न करना पड़े। आने वाले वर्षों में यह पाइपलाइन भारत की गैस जरूरतों का बड़ा सहारा बन सकती है।
SAGE की रिपोर्ट से तैयार हुआ ब्लूप्रिंट
इस परियोजना का आधार ‘द साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज’ यानी SAGE की प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट है। कंपनी ने समुद्र के भीतर पाइपलाइन बिछाने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए करीब 25 करोड़ रुपये खर्च कर 3000 मीटर की परीक्षण पाइपलाइन भी बिछाई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधुनिक तकनीक की मदद से अब गहरे समुद्र में पाइपलाइन डालना और उसकी मरम्मत करना पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और संभव हो चुका है।
3450 मीटर गहराई में बिछेगी पाइपलाइन
यह प्रस्तावित पाइपलाइन समुद्र में करीब 3450 मीटर की गहराई तक जा सकती है। इतनी गहराई इसे दुनिया की सबसे गहरी समुद्री गैस पाइपलाइनों में शामिल कर सकती है। अनुमान है कि इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 31 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस भारत तक पहुंच सकेगी। इससे बिजली उत्पादन, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता मजबूत होगी।
कई देशों से खुलेगा गैस सप्लाई का नया रास्ता
यह परियोजना केवल ओमान तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में इसके जरिए UAE, सऊदी अरब, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और कतर जैसे देशों से भी गैस आयात संभव हो सकता है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में करीब 2500 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार मौजूद है। ऐसे में भारत को लंबे समय तक स्थिर और पर्याप्त गैस सप्लाई मिल सकती है।
तेजी से बढ़ रही भारत की गैस जरूरत
भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। फिलहाल देश की खपत करीब 190 से 195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 300 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार उद्योगों और परिवहन में क्लीन एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, जिससे गैस की मांग और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता
साल 2025 में भारत के LNG आयात का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आया था। फरवरी में ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण यह समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ, जिससे वैश्विक LNG सप्लाई करीब 20 प्रतिशत तक गिर गई। इसका असर कीमतों पर भी पड़ा और सामान्य समय में 10-12 डॉलर प्रति MMBtu मिलने वाली गैस की कीमत बढ़कर 24-25 डॉलर तक पहुंच गई। ऐसे में भारत अब वैकल्पिक और सुरक्षित गैस सप्लाई नेटवर्क तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।