भारत ने तालिबान के खिलाफ प्रतिबंधों को लेकर पाकिस्तान को जमकर निंदा की है। वह सुरक्षा परिषद की समिति की अगुवाई करने के साथ आतंकवाद विरोधी पैनल की सह-अध्यक्षता कर रहा है। पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने शुक्रवार को परिषद की कार्यप्रणाली पर बहस किया। उन्होंने कहा कि परिषद के सदस्यों को निहित स्वार्थ वाली समितियों की अध्यक्षता करने से रोका जाना चाहिए।
दो साल का निर्वाचित सदस्य
उन्होंने कहा कि परिषद में हितों के टकराव गलत है। आपको बता दें, पाकिस्तान परिषद का दो साल का निर्वाचित सदस्य है। पी. हरीश ने पाकिस्तान या तालिबान प्रतिबंध समिति या आतंकवाद-रोधी समिति का नाम लिए बिना उन पर हमला किया।
विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा में देरी
आपको बता दें, समिति के गठन के प्रस्ताव के क्रमांक के आधार पर चुना गया है। इसे 1988 समिति के रूप में जाना जाता है। इस समिति के पास तालिबान सदस्यों की यात्रा पर पाबंदी लगाने का अधिकार है। इस समिति के कारण अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा में देरी हुई।
देशों की सेनाओं के बीच झड़पें हुई हैं
गौरतलब है कि फिलहाल पाकिस्तान तालिबान की अगुवाई में अफगानिस्तान के साथ संघर्ष में है। सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच टशन है। पाकिस्तान आतंकवाद-रोधी समिति का सह-अध्यक्ष है। इसके साथ ही कई आतंकवादी समूहों और नेताओं के लिए सुरक्षित पनाहगाह है।
समयबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए
पाकिस्तान जिन आतंकी समूहों और नेताओं को पनाह दे रहा है। कई संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधित हैं। इसे लेकर पी. हरीश का कहना है कि सहायक निकायों के अध्यक्षों और पेन होल्डर्स का चयन अधिक पारदर्शी है। ये निष्पक्ष और समयबद्ध तरह से होना चहिए। सहायक निकाय परिषद की वह समिति है जो पाबंदी लगाती है। ये विशिष्ट मुद्दों से निपटती है। पेन होल्डर्स परिषद के वे सदस्य होते हैं जिन्हें कुछ देशों के लिए प्राथमिक जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।