
भारत ने पाकिस्तानी एयरलाइंस और विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। अब यह रोक 24 अक्टूबर की सुबह 5:29 बजे तक लागू रहेगी। इस फैसले की जानकारी भारत की एविएशन अथॉरिटी ने सोमवार को नया नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) जारी करके दी।
पाकिस्तान के कदम के बाद भारत की कार्रवाई
भारत का यह फैसला पाकिस्तान के हालिया कदम के तुरंत बाद आया है। दरअसल, पाकिस्तान ने कुछ दिन पहले ही भारतीय विमानों और एयरलाइंस पर लगे अपने हवाई क्षेत्र प्रतिबंध को बढ़ाकर 24 अक्टूबर तक कर दिया था। पाकिस्तान का नया NOTAM 24 सितंबर को खत्म हो रहे पुराने नोटिस से पहले ही जारी कर दिया गया था।
अप्रैल से लगातार जारी है एयरस्पेस बंदी
यह एयरस्पेस विवाद अप्रैल 2025 से चल रहा है। उस समय पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए। इसी के बाद पाकिस्तान ने 24 अप्रैल को भारतीय विमानों और एयरलाइंस को अपने हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने पर रोक लगा दी थी। इसके जवाब में भारत ने 30 अप्रैल को पाकिस्तानी एयरलाइंस और विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया।
मासिक आधार पर जारी हो रहे हैं NOTAM
दोनों देशों ने शुरू में एक-एक महीने के लिए यह बंदी लगाई थी। लेकिन हर महीने नया NOTAM जारी करके इसे आगे बढ़ाया जाता रहा है। अब स्थिति यह है कि भारत और पाकिस्तान दोनों के एयरस्पेस में एक-दूसरे के विमानों और एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाकर यह रोक लगातार छठे महीने में पहुंच गई है।
दूसरे देशों की एयरलाइंस को छूट
दिलचस्प बात यह है कि भारत और पाकिस्तान ने सिर्फ एक-दूसरे की एयरलाइंस और विमानों पर यह प्रतिबंध लगाया है। बाकी दुनिया की एयरलाइंस और विमानों के लिए दोनों देशों का हवाई क्षेत्र खुला हुआ है। यानी यूरोप, खाड़ी देशों, एशिया और बाकी क्षेत्रों की फ्लाइट्स सामान्य रूप से भारत और पाकिस्तान के एयरस्पेस का इस्तेमाल कर सकती हैं।
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दोनों देशों की स्थिति समान
भारत की ओर से जारी ताजा NOTAM और पाकिस्तान का हालिया NOTAM लगभग एक जैसे हैं। दोनों ही देशों ने अपने-अपने हवाई क्षेत्र को एक-दूसरे की एयरलाइंस और सैन्य विमानों के लिए 24 अक्टूबर की सुबह तक बंद रखा है। इससे साफ है कि फिलहाल इस विवाद का हल निकलता नहीं दिख रहा।
तनाव का असर एविएशन सेक्टर पर
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक यह प्रतिबंध जारी रहने से दोनों देशों की एविएशन इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है। खासकर एयरलाइंस को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे खर्च और समय दोनों बढ़ रहे हैं। हालांकि यात्री उड़ानों पर असर सीमित है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के लिए रास्ते खुले हैं।