भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हुए बड़े सैन्य नुकसान के बाद पाकिस्तान ने अपनी सुरक्षा रणनीति में तेजी से बदलाव किया है। खुफिया आकलन के अनुसार, इस्लामाबाद ने अगले संभावित हमले से बचाव के लिए चीन और तुर्की से आधुनिक ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, टैंक और नौसैनिक प्लेटफॉर्म समेत अरबों डॉलर के हथियार खरीद लिए हैं। इन सौदों की विस्तृत सूची सामने आने से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण फिर चर्चा में आ गए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, भारत की कार्रवाई में आतंकी ठिकानों, रडार साइट्स और कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचने के बाद पाकिस्तान ने अपने रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम को तेज कर दिया। रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय ने वायु रक्षा, ड्रोन युद्ध और समुद्री सुरक्षा पर खास जोर देते हुए नए प्लेटफॉर्म शामिल करने का फैसला लिया।
चीन-तुर्की से हाई-एंड ड्रोन की खरीद
पाकिस्तान ने कुल 31 मानवरहित लड़ाकू हवाई सिस्टम हासिल किए हैं। इनमें तुर्की से एक हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन और चीन से 30 आधुनिक HALE ड्रोन शामिल बताए गए हैं। दावा है कि इनकी ऑपरेशनल रेंज 6,000 किलोमीटर से अधिक है और ये हवा-से-हवा मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम दागने के साथ 8 किलोमीटर से ऊपर उड़ान भरने में सक्षम हैं।
कामिकेज और लोइटरिंग म्यूनिशन पर फोकस
खुफिया आकलन में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान ने 200 किलोमीटर से अधिक रेंज वाले 1,014 लोइटरिंग म्यूनिशन और कामिकेज ड्रोन खरीदे हैं। तुर्की से सैकड़ों YIHA और Kargi सिस्टम लिए गए हैं, जबकि चीन से कई उन्नत मॉडल शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, 50 किलोमीटर से कम दूरी के लिए 1,700 से ज्यादा छोटे आत्मघाती ड्रोन भी बेड़े में जोड़े गए हैं।
मिसाइल, टैंक और नौसैनिक ताकत में इजाफा
ड्रोन के अलावा, पाकिस्तान ने लंबी दूरी की मिसाइलें, अटैक हेलीकॉप्टर, मेन बैटल टैंक, होवरक्राफ्ट, कॉर्वेट और सबमरीन खरीदने के समझौते किए हैं। माना जा रहा है कि इन सौदों का उद्देश्य सीमा सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री मोर्चे पर भी क्षमता बढ़ाना है।
अरबों डॉलर के सौदे और कूटनीतिक संकेत
इन हथियारों की खरीद अरबों डॉलर में बताई जा रही है। खास बात यह है कि पाकिस्तान ने अपने पारंपरिक सहयोगी चीन के साथ-साथ तुर्की पर भरोसा जताया है। जानकारों के मुताबिक, इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।