इन दिनों भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ती हुई नजर आ रही है. नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने मई में बताया था कि भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. इसके साथ ही भारत ने करीब 4 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक आकार के साथ जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे विकसित देशों को पछाड़ दिया है.
IMF ने जताया 2026 में भी मजबूत ग्रोथ का अनुमान
वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के नवीनतम आकलन के मुताबिक 2026 में भी भारत की विकास गति इसी तरह की बनी रहेगी. संस्था का कहना है कि अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद भारत लगातार चौथे स्थान पर रहेगा और उसका आर्थिक आकार 4.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. यह अनुमान साफ तौर पर बताता है कि भारत के विकास कहानी अभी और आगे बढ़ने वाली है.
तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरेगा भारत
दूसरी तरफ इन्वेस्टमेंट कंपनी मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि भारत 2028 तक जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन कर उभरेगा. वहीं 2035 तक भारत की GDP लगभग दोगुनी होकर 10.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. यह संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर और भी बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा.
2026-27 में भी विकास दर 6.4 और 6.5 फीसद रहने की उम्मीद
वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भी भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर सकारात्मक रुख जाहिर किया है. एजेंसी का कहना है कि साल 2025 में भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. जो कि साल 2024 के मुकाबले बेहतर होगी. इसके साथ ही 2026 और 2027 में भी विकास दर 6.4 और 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. इससे ये साबित होता है कि भारत G-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
"भारत की बड़ी आबादी अभिशाप नहीं, बल्कि ताकत"
इकोनॉमिस्ट प्रोफेसर आलोक पुराणिक की मानें तो भारत की अर्थव्यवस्था को समझने के लिए उसके सामाजिक ढांचे को देखना जरूरी है. देश की लगभग 5 फीसदी आबादी बेहद समृद्ध है, जिसे वे भारत का ‘अमेरिका’ बताते हैं. वहीं 35–40 करोड़ लोग मिडिल क्लास हैं, जिसे वे ‘मलेशिया’ कहते हैं. बाकी करीब 80 करोड़ लोग अभी भी सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं, जिसे वे ‘युगांडा’ की तरह मानते हैं. आर्थिक असमानता को कम किए बिना विकास को लंबी दौड़ में स्थिर नहीं बनाया जा सकता है. आलोक पुराणिक का कहना है कि भारत की बड़ी आबादी अब अभिशाप नहीं, बल्कि ताकत बनती जा रही है. जितनी ज्यादा जनसंख्या, उतना बड़ा बाजार, जिसकी वजह से कंपनियों को अधिक ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलता है. यही वजह है कि ऐप्पल जैसी वैश्विक कंपनियां भी भारत में उत्पादन बढ़ा रही हैं और यहां की संभावनाओं का लाभ उठा रही हैं.
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टूरिज्म, मेडिकल, शिक्षा, एंटरटेनमेंट में भी संभावनाएं
प्रोफेसर पुराणिक का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग के साथ–साथ टूरिज्म, मेडिकल, एजुकेशन और एंटरटेनमेंट जैसे सेक्टरों में भी भारी संभावनाएं हैं. सर्विस और सॉफ्टवेयर उद्योग पहले से मजबूत हैं लेकिन अन्य क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जाए तो भारत का आर्थिक आधार और व्यापक हो सकता है. आने वाले सालों में भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है.बस अपनी आंतरिक क्षमताओं को और निखारने की जरूरत है.