मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। तेल, गैस और उर्वरक के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर भारत के सामने भी संभावित आपूर्ति बाधित होने का खतरा माना जा रहा है। हालांकि सरकार ने इस जोखिम को देखते हुए वैकल्पिक सप्लाई, रणनीतिक भंडार और नए अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर तेजी से काम शुरू कर दिया है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों पर असर न पड़े।
दूसरे सप्लायर्स से भी संपर्क में भारत
भारत के लिए कतर फिलहाल एक अहम गैस सप्लायर बना हुआ है, जो देश को करीब 60 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन गैस की आपूर्ति करता है। लेकिन बढ़ते तनाव के बीच भारत अब अन्य विकल्पों की भी तलाश कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भारत को गैस बेचने का प्रस्ताव दिया है। भारत फिलहाल करीब 195 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन गैस आयात करता है, इसलिए सरकार वैकल्पिक बाजारों से गैस खरीदने की संभावनाओं पर काम कर रही है।
दिन में दो बार हो रही ऊर्जा स्थिति की समीक्षा
सूत्रों के अनुसार सरकार ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और दिन में दो बार इसकी समीक्षा की जा रही है। भारत के पास फिलहाल पर्याप्त ऊर्जा स्टॉक मौजूद है और इसे लगातार बढ़ाया भी जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की कोई कमी नहीं है और भारत कई अन्य सप्लायर्स के संपर्क में भी है, जिससे आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम हो जाती है।
ये भी पढ़ें : वैश्विक मंदी के बीच भारत बना उम्मीद की किरण, IMF बोला दुनिया की ग्रोथ का बड़ा इंजन
तेल उत्पादकों और एजेंसियों से बातचीत तेज
भारत क्रूड ऑयल और एलपीजी की खरीद के लिए बड़े तेल उत्पादकों और ट्रेडर्स से बातचीत कर रहा है। इसके अलावा सरकार इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन से भी संपर्क में है। हाल ही में भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के साथ नए ऊर्जा समझौते भी किए हैं। साथ ही जहाजों के लिए बीमा की व्यवस्था को लेकर अमेरिका से बातचीत चल रही है।
पर्याप्त स्टॉक से फिलहाल चिंता की जरूरत नहीं
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत के पास कुल मिलाकर करीब आठ सप्ताह का क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है, जिसमें रणनीतिक भंडार भी शामिल हैं। देश का केवल लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल ही होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है, जिससे किसी संभावित बाधा का खतरा सीमित रहता है। भारत के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक और करीब 25 दिनों का पेट्रोल-डीजल का भंडार मौजूद है।
पेट्रोल-डीजल की राशनिंग की कोई योजना नहीं
सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की राशनिंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मौजूदा भंडार मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। जरूरत पड़ने पर गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड प्राथमिक क्षेत्रों जैसे बिजली उत्पादन और उर्वरक उद्योग के लिए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता दे सकती है। सरकार लगातार हालात की निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने की भी तैयारी रखी गई है।