भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक और बड़ा फैसला लिया है, जिससे पाकिस्तान की हेकड़ी निकल सकती है। भारत ने सिंधु जल संधि को प्रभावी रूप से निलंबित कर दिया है, जिससे पाकिस्तान को साझा जल स्रोतों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत से अनुरोध करना पड़ा है।
इस फैसले के बाद, भारत ने कई जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया है, जिनमें सावलकोट, रातले, बरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू और कीर्थई चरण-एक और चरण-दो शामिल हैं। ये परियोजनाएं भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों में अहम भूमिका निभाएंगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के साथ बातचीत करने की इच्छा जताई है, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद और हिंसा से मुक्त वातावरण में ही पाकिस्तान के साथ बातचीत करेगा।
EAC की 45वीं बैठक में मंजूरी
जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने इस माह की शुरुआत में अपनी 45वीं बैठक में इस परियोजना को स्वीकृति दी। इससे लगभग 3,200 करोड़ रुपये की लागत वाली इस 'रन-ऑफ-द-रिवर' परियोजना के निर्माण को लेकर निविदाएं जारी करने का रास्ता साफ हुआ।
'रन ऑफ द रिवर' जल-विद्युत परियोजना का अर्थ है कि ऐसी परियोजना जो नदियों के जल प्रवाह में बिना किसी बाधा के जल-विद्युत का उत्पादन करती है. इसमें नदी के मार्ग में बिना बड़े बांध बनाए प्रवाहित जल का इस्तेमाल होता है।
पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि तोड़ी
समिति ने इस बात का संज्ञान लिया कि चिनाब बेसिन का पानी 1960 की सिंधु जल संधि के प्रावधानों तहत भारत और पाकिस्तान के बीच साझा होता रहा है। परियोजना के मापदंड उसी संधि के अनुरूप तय होते थे। सिंधु जल संधि 23 अप्रैल 2025 से प्रभावी रूप से निलंबित है.