
अमेरिकी एच1बी वीजा कार्यक्रम पर रोक को लेकर एक बयान में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के उद्योग नवाचार और रचनात्मकता से संबंधित हैं। इस मामले में विचार-विमर्श की उम्मीद है। एच-1बी वीजा के आवेदनों पर एक लाख अमेरिकी डॉलर के वार्षिक शुल्क लगाने के मामले में अमेरिका के फैसले पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रया दी है।
आपको बता दें कि एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर के वार्षिक शुल्क लगाया गया है। अमेरिकी फैसले पर भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है कि फैसले के पूर्ण प्रभावों का अध्ययन हो रहा है। भारतीय उद्योग समेत सभी संबंधित पक्षों की ओर से इसका विश्लेषण जारी है। इस कदम के मानवीय परिणाम होने की संभावना है। इससे कई परिवारों को परेशानी होगी।
विचार-विमर्श की उम्मीद है: मंत्रालय
अमेरिकी एच1बी वीजा कार्यक्रम पर रोक के संबंध में एक बयान में विदेश मंत्रालय के अधिकारिक प्रवक्ता ने कहा भारत और अमेरिका दोनों के उद्योग नवाचार और रचनात्मकता में रुचि रखते हैं। आने वाले कदमों में विचार-विमर्श की उम्मीद हो रही है। बयान में कहा गया है, "सरकार ने अमेरिकी एच1बी वीज़ा कार्यक्रम पर प्रस्तावित प्रतिबंधों से संबंधित रिपोर्ट को देखा है। इस फैसले से पूर्ण प्रभावों का अध्ययन भारतीय उद्योग सहित सभी पक्षों की ओर से जारी है। इससे एच1बी कार्यक्रम से जुड़ी कुछ धारणाओं को स्पष्ट करते हुए एक प्रारंभिक विश्लेषण पहले ही पेश किया गया है।" बयान में कहा गया है,"भारत और अमेरिका दोनों के उद्योग नवाचार और रचनात्मकता से जुड़े हैं।