भारत की जनसंख्या और धार्मिक संरचना को लेकर आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वैश्विक स्तर पर जनसंख्या वृद्धि, जन्म दर और सामाजिक बदलावों के आधार पर कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने 2050 तक की संभावित तस्वीर पेश की है। अनुमान बताते हैं कि भारत हिंदू बहुल देश बना रहेगा, लेकिन मुस्लिम आबादी में तेज बढ़ोतरी के कारण देश दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला राष्ट्र भी बन सकता है।
दुनिया की आबादी में बड़ा बदलाव संभव
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2010 में दुनिया की कुल आबादी लगभग 6.9 अरब थी, जो 2050 तक बढ़कर करीब 9.3 अरब तक पहुंच सकती है। इस दौरान विभिन्न धर्मों की आबादी में भी तेजी से बदलाव होने का अनुमान लगाया गया है। खासतौर पर मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर सबसे अधिक रहने की संभावना जताई गई है। वहीं हिंदू आबादी में भी लगातार बढ़ोतरी जारी रहने का अनुमान है।
मुस्लिम आबादी सबसे तेजी से बढ़ने का अनुमान
अनुमानों के मुताबिक 2010 से 2050 के बीच मुस्लिम आबादी में करीब 73 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। दुनिया में मुसलमानों की संख्या 1.6 अरब से बढ़कर लगभग 2.76 अरब तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। दूसरी तरफ हिंदुओं की आबादी में भी लगभग 34 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। हालांकि वैश्विक हिस्सेदारी के हिसाब से हिंदुओं का प्रतिशत लगभग स्थिर रहने की संभावना है।
भारत हिंदू बहुल देश बना रहेगा
अनुमान बताते हैं कि 2050 तक भारत में हिंदू आबादी सबसे ज्यादा रहेगी। देश में हिंदुओं की संख्या करीब 1.29 अरब तक पहुंच सकती है। वहीं मुस्लिम आबादी 31 करोड़ से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। इसके बावजूद भारत की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 78 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़कर करीब 18 फीसदी तक पहुंच सकता है।
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश बन सकता है भारत
वर्तमान में इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश माना जाता है, लेकिन अनुमान है कि 2050 तक भारत इस मामले में आगे निकल सकता है। इसका कारण भारत की कुल जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी और मुस्लिम समुदाय की तेज जनसंख्या वृद्धि दर को माना जा रहा है। अगर अनुमान सही साबित होते हैं, तो दुनिया की कुल मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा भारत में रह सकता है।
दूसरे धर्मों की स्थिति भी बदलेगी
भारत में ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन समुदायों की आबादी में भी वृद्धि होने की संभावना है, लेकिन कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत स्थिर रह सकती है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में हिंदू आबादी 79.8 फीसदी और मुस्लिम आबादी 14.2 फीसदी थी। आने वाले दशकों में यह अनुपात कुछ हद तक बदल सकता है, लेकिन धार्मिक विविधता भारत की पहचान बनी रहेगी।