मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कई जरूरी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को अस्थायी रूप से हटा दिया है। यह फैसला 30 जून तक लागू रहेगा। इस कदम का मकसद देश में जरूरी कच्चे माल की सप्लाई बनाए रखना और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना है।
सप्लाई चेन पर पड़ा असर
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। केमिकल, फर्टिलाइजर और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे में भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौती बन गई थी, जिसे देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया।
इन प्रोडक्ट्स पर मिली छूट
सरकार ने जिन उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी हटाई है, उनमें मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर और पॉली ब्यूटाडीन जैसे केमिकल शामिल हैं। इसके अलावा स्टाइरीन ब्यूटाडीन और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन को भी राहत दी गई है। ये सभी कई उद्योगों के लिए बेहद जरूरी कच्चा माल हैं।
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उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
इस फैसले से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल और केमिकल सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। कच्चे माल की लागत कम होने से उत्पादन सस्ता होगा। इससे कंपनियों का खर्च घटेगा और उद्योगों को राहत मिलेगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।
आम लोगों को कैसे मिलेगी राहत
जब उत्पादन लागत घटेगी तो इसका असर बाजार में मिलने वाले सामान की कीमतों पर भी पड़ेगा। यानी प्लास्टिक के सामान, दवाइयों, पैकेजिंग और अन्य रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो सकती हैं। इससे आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होगा और महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले भी उठाए गए कदम
सरकार इससे पहले भी पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर चुकी है। इसके साथ ही डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी भी लगाई गई थी। अब कस्टम ड्यूटी हटाने का यह फैसला दिखाता है कि सरकार बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच घरेलू बाजार को स्थिर रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है।