
India reopens embassy in Kabul: अफगानिस्तान में भारत और तालिबान सरकार के बीच कूटनीतिक रिश्तों में नया अध्याय जुड़ गया है। अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत दौरे पर हैं और इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच चार साल बाद किसी उच्च-स्तरीय संपर्क का संकेत है। बैठक के दौरान जयशंकर ने काबुल में भारत के तकनीकी मिशन को दूतावास का दर्जा देने की घोषणा की। मुत्ताकी ने कहा कि भारत अफगानिस्तान का घनिष्ठ मित्र है और दोनों देश आपसी सम्मान और सहयोग पर आधारित संबंध चाहते हैं।
भारत-अफगान संबंधों को मिले नई दिशा
अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी ने कहा कि हाल ही में आए भूकंप में भारत ने सबसे पहले मदद भेजकर अपनी दोस्ती साबित की। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान किसी भी संगठन को अपनी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ नहीं करने देगा। वहीं जयशंकर ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए अफगानिस्तान की एकजुटता की सराहना की और कहा कि भारत अफगान स्वास्थ्य और पुनर्वास क्षेत्र में लगातार मदद कर रहा है। भारत की ओर से 20 एम्बुलेंस, नई मेडिकल मशीनें, वैक्सीन और कैंसर की दवाइयां भेजी जा रही हैं।
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आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई
जयशंकर ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान दोनों के लिए सीमा पार आतंकवाद एक साझा खतरा है, जिसका मिलकर मुकाबला करना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत की खाद्य और मानवीय सहायता आगे भी जारी रहेगी और नई खेप पहले ही काबुल पहुंच चुकी है। भारत भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में आवास पुनर्निर्माण और अफगान शरणार्थियों की मदद में भी सक्रिय है। काबुल में दूतावास की पुनः स्थापना के साथ दोनों देशों के रिश्तों में एक नई गर्माहट लौट आई है, जो दक्षिण एशिया में स्थिरता और सहयोग के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।